पैट्रिक फ़ैंच की किताब –
आज़ादी या मौत
- मुस्लिम लीग के नेता सैयद अली इमाम ने सन् 1908 के दशक की शुरूआत में कांग्रेसी नेताओं का हवाला देते हुए कहा था- मैं कलकत्ता और पूना,दोनों जगहों पर बैठे भारतीय राष्ट्रीयता के निर्माताओं से पूछता हूं कि भारत के मुसलमान...’वन्दे मातरम्’ की साम्प्रदायिक चीख़-पुकार और शिवजी की पूजा अर्चना क़ुबूल कर लें?
हालांकि, गांधी जी ने कहा कि अपनी प्रार्थना सभाओं में हम कुरान की
आयतों को शामिल करेंगे लेकिन इस्लाम के मुताबिक़, ऐसी सोच वाला नज़रिया बर्दाश्त
के क़ाबिल नहीं माना गया।
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