पैट्रिक फ़ैंच की किताब –
आज़ादी या मौत
1919 में जलियावाला बाग़ में हुए नरसंहार के बाद बापू ने कहा था कि
वहां मरने वाले को किसी भी रूप में शहीद
नहीं कहे जा सकते। शहीद वे तब अगर ( जवाब में ) उन्होंने ने अपनी तलवारें म्यान से
निकालकर मुक़ाबला किया होता या कम-से-कम लाठी ही चलाई होती या जब डायर पूरी
धृष्टता से वहां घूस आया था तो उसके सामने छाती तान कर खड़े हो जाते। उन्हें जान बचाकर नहीं भागना चाहिए था। (
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