शनिवार, 15 जून 2019

जलियावाला बाग़ से सम्बन्धित


पैट्रिक फ़ैंच  की किताब – आज़ादी या मौत
 


1919 में जलियावाला बाग़ में हुए नरसंहार के बाद बापू ने कहा था कि वहां मरने वाले को  किसी भी रूप में शहीद नहीं कहे जा सकते। शहीद वे तब अगर ( जवाब में ) उन्होंने ने अपनी तलवारें म्यान से निकालकर मुक़ाबला किया होता या कम-से-कम लाठी ही चलाई होती या जब डायर पूरी धृष्टता से वहां घूस आया था तो उसके सामने छाती तान कर खड़े हो जाते। उन्हें  जान बचाकर नहीं भागना चाहिए था।                                                                                          ( पेज- 24)

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