सोमवार, 10 जून 2019

1857 के संग्राम से सम्बन्धित


पैट्रिक फ़ैंच  की किताब – आज़ादी या मौत
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- 1857 में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त बगावत हुई, जैसाकि माना गया है कि हिन्दू सिपाहियों के कारतूसों के ऊपर सिरों पर गाय की चर्बी (जिसे मुंह से खोलना पड़ता था) लगाने से भड़के असंतोष के कारण बग़ावत हुई। वास्तव में इसके अलावा भी विद्रोह के अनेक कारण थे। पिछले साल अवध के नवाब के राज्य को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से अधिकार में ले लेने से मुस्लिम के मन में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ असंतोष बढ़ गया ( छिना गया क्षेत्र बाद में यूनाइटेड प्रोविंस कहलाया )।अंग्रेज़ों ने एक नया एनलिस्टमेट एक्ट बना दिया। तदानुसार भारतीय सिपाहियों को कहीं भी भेजा जा सकता था-विदेश भी। हिन्दू सिपाही इसे अपनी जातिगत धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने जैसा मानने लगे। इस एक्ट ने भी बग़ावत की भावना को भड़काया। बग़ावत के परिणाम स्वरूप चारो ओर भयंकर हिंसा भड़क उठी। बग़ावत के बाद जो प्रतिरोध की आग जली, उससे दोनों पक्षों का आपसी विश्वास खण्ड-खण्ड हो गया।                                                                                                                      ( पेज-8) 

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