शनिवार, 15 जून 2019

मोहम्मद अली जिन्ना।


पैट्रिक फ़ैंच  की किताब – आज़ादी या मौत 

- बापू के विरोधी मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था कि ट्रेन की प्रथम श्रेणी में यात्रा करने के बावजूद उनकी यात्रा में गांधी के सफ़र के मुक़ाबले कम ख़र्च होता है, क्योंकि उन्हें तो एक ही टिकट ख़रीदना पड़ता है।                                                                                        ( पेज-25)   


- लॉर्ड माउंटबेटन कहा करते थे जिन्ना को समझ पाना असम्भव है।                      ( पेज- 34)



- 1913 में जब जिन्ना मुस्लिम लीग का सदस्य बनने का फ़ैसला किया तो कांग्रेसी नेता मोतीलाल नेहरू ने अपने मित्रों से कहा था कि जिन्ना हम सबकी तरह ही पक्के राष्ट्रवादी हैं, यद्यपि अधिकांश मुसलमान ऐसे नहीं हैं। वे तो समाज के सामने हिन्द-मुसलमान एकता की मिसाल रख रहे हैं। प्रथम विश्वयुद्ध से पहले के सालों में जिन्ना धार्मिक एकता की भावना को बढ़ाने देने वाले व्यक्ति लगने लगे थे। उनका कहना था कि उपनिवेशवाजी शासन का अन्त करने के लिए हिन्दू-मुसलमान दोनों को मिलकर संघर्ष करना होगा।                                                                             ( पेज-37)
                                     

      

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