पैट्रिक फ़ैंच की किताब – आज़ादी या मौत
- इस दुष्ट सरकार का नाश करने के लिए मेरा जन्म हुआ- मोहनदास गांधी, 1930
(पेज- परिचय 17)
- मानव इतिहास में सबसे ज़्यादा किताब गांधी जी पर लिखी है। गांधी जी
की जीवनी लिखने वालों में से बेहद चतुर जुडिथ ब्राउन का कहना है कि इतना वक़्त
गुज़र जाने के बाद यह समझ पाना लगभग असम्भव लगता है कि गांधी जी के दिमाग़ में
क्या चल रहा है? ( पेज- 22)
- गांधी जी मानव मल को ‘काला सोना’ कहकर उसे बढ़ावा देते। इसके प्रबन्ध
और प्रयोग के लिए उनके पास विस्तृत थ्योरियां थी कि फ़स्ल उगाने में इसका इस्तेमाल
कैसे किया जाए।
( पेज-25)
- बापू अपने अनुयायियों को लिखे पत्रों में ऐसी बातों का वैविध्य रहता: योनि स्त्राव के लिए कुल्हा स्नान
कितना उपयोगी है वहैरह-वहैरह। हर सुबह उनकी अपनी महिला अनुयायियों से पहला सवाल
होता-बहनों! आज प्रात: आपका पेट साफ़ हुआ या नहीं?
नग्न लड़कियों के साथ उनके सोने की आदत का शिवसेना नेता बाल ठाकरे ने काफ़ी
मज़ाक उड़ाया था। कांग्रेस से जुड़े लोगों ने इस पर आक्रोश जताया,सड़कों पर जुलूस
भी निकाले। (पेज-26)
- राष्ट्रीय महानायक मोहनदास गांधी ने जिन्ना को पागल और दुष्ट
प्रतिभावान कहा था।
( पेज- 34)
- गांधी जी ने एक बार कहा था- जहां तक मेरी बात हैं,मैं तहे दिल से
केवल ही धर्म में आस्था रखता हूं वह है हिन्दू धर्म। मुझे एक हिन्दू होने पर गर्व
है,लेकिन मैं एक पाखंडी हिन्दू नहीं हूं।
( पेज- 48)
- अपने विश्वस्त महादेव देसाई से सन् 1918 में गांधी जी ने व्यक्तिगत
रूप से कहा था कि हालांकि हम कहते हैं कि हिन्दू-मुसलमान भाई-भाई हैं, लेकिन मुझे
नहीं लगता है कि आजकल भाई-भाई हैं। भविष्य में सभी धर्मों का अन्तर ख़त्म नहीं हो
पाएगा,लेकिन हिन्दुत्व अपने दयाभाव के बल पर मुसलमानों का दिल जीत लेगा। ( पेज-
49)
- गांधी जी दिसम्बर 1920 में जब बिहार में एक गौशाला देखने गए तो
उन्होंने वहां भाषण दिया ‘जो आदमी गौरक्षा के लिए अपना जीवन
न्योछावर करने के लिए तैयार नहीं है, मैं उसे हिन्दू नहीं मानूंगा। गाय संरक्षण
मेरे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की जीवन। क्या एक मुसलमान के लिए गौहत्या
करना उतना ही ज़रूरी है, जितना की नमाज़ अदा करना। मैं उन मुसलमानों से कहना
चाहूंगा कि मैं तुम्हारे लिए लड़ने के लिए भी तैयार हूं, लेकिन गौहत्या उनका
मज़हबी कृत्य नहीं है। मुसलमान के साथ बैर-भाव वाले रवैये ने ही उसे गौहत्या करने
की ओर अग्रसर किया है।’
( पेज- 48)
- ख़िलाफ़त आन्दोलन चलाने वाले दो भाई शौकत अली और मुहम्मद अली थें। जब
सन् 1920 के मध्य में ख़िलाफ़त आन्दोलन मन्द पड़ गया तो, मुहम्मद अली ने गांधी जी
के साथ अपने गठबन्धन को भौतिक लाभ या सुख-सुविधा के लिए किया गया समझौता
बताया। उसने बखेड़ा खड़ा करने वाले लहजे में कहा ‘राजनीतिक गठबन्धन ऐसी खूबसूरत महिलाओं
की तरह होते हैं जिनका बलात्कार अवश्यभावी है।’
(पेज-
51)
- महात्मा गांधी जब सन् 1924 में जेल से रिहा हुए तो उन्होंने राजनीति
से अपने क़दम वापस खींच लिया और अपना पूरा ध्यान गांव की सफ़ाई के प्रबन्ध,
स्वास्थय, शिक्षा, छूआछूत को ख़त्म करने और हाथ के बुने ख़ादी के कपड़ों का
उत्पादन करने पर केन्द्रित कर दिया। उन्होंने महसूस किया कि भारत के गांवों री
अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पुनर्निर्माण करने के लिए यह बहुत आवश्यक
है।
(पेज- 51)
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