मंगलवार, 11 जुलाई 2017

सलीम शेख को मेरा भी सलाम!

दफ़्तर से घर को लौट रहा हूं,मेरे ऊपर उदासी का पहरा है।कुछ लिख़ने का तो मन नही कर रहा है,फ़िर भी लिख़ रहा हूं,वो इस ख़्याल में की आपके साथ अपनी वेदना को साझा कर रहा हूं।
बीती रात तकरीबन 08:30 बजे अमरनाथ यात्रियों पर अन्नतनाग में हुए आतंकी हमले के बारे में तकरीबन हर पहलूओं की ज़ानकारी मिल ही गई होगी।क्योंकि टीवी पर सुबह से ही इस ख़बर के हर एक पहलू पर बात हुई है।बस चालक सलीम शेख की वीरतापूर्ण कर्तव्य निवाह को देखते हुए कई लोग दो समुदायों की सौहार्दता का मिशाल दे रहें हैं,तो कई लोग उनकी वीरता को सलाम कर रहें,लेकिन कुछ लोग इन सब बातों से इनकार कर रहें हैं।इनकार करने वाले तर्क दे रहें हैं कि सलीम ने अपनी जान बचाने के लिए गाड़ी को तेज़ी से भगाई।इन सब बातों से इतर हिन्दुस्तान के लोग सलीम समेत उनके परिवार में और  खुशियां आए,इसकी बात कर रहें हैं। इसी ख़बर से जुड़ी कुछ बातें मैं आपसे साझा कर रहा हूँ,जो इस प्रकार है-
👉अमरनाथ यात्रा को लेकर हमेशा सरकारें कई तरह के सुरक्षा इन्तजामात करती है।जैसे कि सेना के अलावा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की भी मदद लेती है।इस बार तो ड्रोन कैमरे से भी निगरानी हो रही थी।फ़िर ये इतना बड़ा हादसा कैसे हो गया?
👉मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक़ आईबी ने कम से कम 50 बार ,जिस गाड़ी पर उसकी सूचना दी गई।और आगे भी आतंकी हमले की आशंका जताई जा रही है।
👉जिस गाड़ी पर हमला हुआ उसके चालक सलीम शेख को वीरता पुरस्कार से नवाज़ने के लिए,गुजरात के सीएम विजय रूपानी केन्द्र सरकार से सिफ़ारिश करने की बात कही।
👉बकौल सलीम,बाबा बर्फ़ानी के दर्शन करने जाते वक़्त कोई तकलीफ़ नही हुई।दर्शन बहुत अच्छे से हुए।लौटते वक्त ऐसा हादसा हो गया।लेकिन बाबा और मालिक ने हिम्मत दी तो निकल गए। हमले से लेकर अस्पताल तक तो मिलट्री वालों ने बहुत सहयोग किया।लेटकर गाड़ी चलाना आसान नही था,लेकिन बाबा की कृपा और  मालिक ने बहुत हिम्मत दिया।पुरस्कार वगैरह की बात तो फ़िलहाल नही कर सकता,क्योंकि मेरे सामने सिर्फ़ अभी वही नज़ारा है।मेरे यात्रियों को मारने वालों को जब सेना मारेगी ना,तब खाना अन्दर जाएगा और दिल को तसल्ली होगी।
👉बकौल सलीम की पत्नी, उनके बेटे के कान की कॉपरेशन हुई है,जिसकी वज़ह से वो सलीम को बार-बार जाने से रोकता रहा।हमलोगों ने भी कई बार रोका ।लेकिन वो(सलीम) ये बात बोले कि 'सवारी लोग ना जाने को बोल रहा है, वो लोग(यात्री) मेरे बिना नही जाएगा।इसलिए मुझे जाना पड़ेगा।' सलीम पिछले 8 साल से उनलोगों को बाबा बर्फ़ानी के दर्शन के लिए ले जाता है।
👉बकौल सलीम की मां,ख़ुदा ने हमें एक साथ बनाया है और एक साथ रहने के लिए बनाया, फ़िर ऐसा क्यों करतें हैं।एक साथ रहो ना मिलजुल कर।
                                 बहरहाल इस हमले को लेकर कई सवाल हैं,जिसका ज़वाब बीतते वक़्त के साथ मिलता रहेगा,तो कुछ सवालों का नही भी मिलेगा।
मेरी पीड़ा ये है कि एक पत्रकार जो अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर कई ख़बरों को लिखता होगा,तमाम तैयारियों के बारे में जैसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए फ़लां ज़गह इतने,फ़लां ज़गह इतने जवान तैनात किए गये हैं।फ़लां ज़गह ड्रोन और फ़लां इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ से सुरक्षा के कड़े इन्तजामात किए जा रहें हैं।सुरक्षा के इतने इन्तजामात के बारे में सुन-सुनकर एक तरीके वो किसी भी ख़तरे की आशंका से बाहर निकल जाता होगा,और जब वो अचानक इस तरीके की दिल दहलाने वाली घटना के बारे में सुनता होगा,तो उसपे क्या बीतती होगी?

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