कल सुबह जैसे ही दफ़्तर पहुंचा, चैनल में लगे बड़े-बड़े टीवी स्क्रीनों पर,मैनचेस्टर एरीना में हुए आत्मघाती हमले में बेतहाशा इधर-उधर भागते छोटे-2 बच्चे,बड़े-बुजुर्गों की तस्वीरें और आपातकालीन वाहनों की शायरन ने मुझे सकते में डाल दिया।मन ही मन हमले में ज़्यादा क्षति ना हुई हो,को सोचते हुए आगे बढ़ा।बीतते समय के साथ हमले से जुड़ी जानकारियां सामने आने लगी।
टीवी रिपोर्ट के मुताबिक मैनचेस्टर एरीना में एक कनसर्ट में अमेरिकी पॉप सिंगर और धारावाहिक की कलाकार एरीयाना ग्रांडे के कार्यक्रम में हुए 2 आत्मघाती हमले में करीब 22 लोग मारे गये और 59 लोग ज़ख्मी हुए।
हमले को ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे ने कायरना हरकत बताते हुए कहा कि गम्भीर ख़तरा बना हुआ है और आतंकवादी हमले की सम्भावना बनी हुई है।
हमले को लेकर हमारे देश के भी पीएम नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर 'निन्दा और सम्वेदना' वाली रश्म अदा की।वैसे पीएम के इस ट्वीट के बाद,कई लोगों ने पीएम से झारखंड में कथित बच्चा चोरों को पुलिस के सामने पीट-पीटकर मार देने पर सवाल पूछा।
जब से होश सम्भाला हूं,एक ही बात सुनता आ रहा हूं कि आतंकवाद की समस्या से कई देश जूझ रहें हैं।इस समस्या से निपटने के लिए विश्व के शक्तिशाली देशों को एक साथ आने में क्या समस्या है?जिस तरीक़े से अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर एकजुटता की बात करते हैं,वैसे ही आतंकवादीयों को संरक्षण देने वाले देशों को सबक सिखाने में क्यों नही जुट जाते हैं?अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर 'आतंकवाद से निपटने के लिए एक साथ आना होगा' वाली बात औपचारिकता भर रह जाती है और जब भी कही हमला होता है सब ट्वीट के माध्यम से ज़िम्मेदारी निभा देते है।
बीते 21 मई को रियाद में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले विदेश यात्रा में,पाकिस्तान समेत 40 मुस्लिम देशों के प्रमुख के सामने कहा कि अपनी ज़मीन पर आतंकवाद को बढ़ावा ना दें।हम चाहते हैं कि मुस्लमान भी आपस मिलकर रहें।ट्रम्प का ये बयान उनकी छवि के उलट शान्ति का पैगाम माना चाहिए।
टीवी रिपोर्ट के मुताबिक मैनचेस्टर एरीना में एक कनसर्ट में अमेरिकी पॉप सिंगर और धारावाहिक की कलाकार एरीयाना ग्रांडे के कार्यक्रम में हुए 2 आत्मघाती हमले में करीब 22 लोग मारे गये और 59 लोग ज़ख्मी हुए।
हमले को ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे ने कायरना हरकत बताते हुए कहा कि गम्भीर ख़तरा बना हुआ है और आतंकवादी हमले की सम्भावना बनी हुई है।
हमले को लेकर हमारे देश के भी पीएम नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर 'निन्दा और सम्वेदना' वाली रश्म अदा की।वैसे पीएम के इस ट्वीट के बाद,कई लोगों ने पीएम से झारखंड में कथित बच्चा चोरों को पुलिस के सामने पीट-पीटकर मार देने पर सवाल पूछा।
जब से होश सम्भाला हूं,एक ही बात सुनता आ रहा हूं कि आतंकवाद की समस्या से कई देश जूझ रहें हैं।इस समस्या से निपटने के लिए विश्व के शक्तिशाली देशों को एक साथ आने में क्या समस्या है?जिस तरीक़े से अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर एकजुटता की बात करते हैं,वैसे ही आतंकवादीयों को संरक्षण देने वाले देशों को सबक सिखाने में क्यों नही जुट जाते हैं?अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर 'आतंकवाद से निपटने के लिए एक साथ आना होगा' वाली बात औपचारिकता भर रह जाती है और जब भी कही हमला होता है सब ट्वीट के माध्यम से ज़िम्मेदारी निभा देते है।
बीते 21 मई को रियाद में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले विदेश यात्रा में,पाकिस्तान समेत 40 मुस्लिम देशों के प्रमुख के सामने कहा कि अपनी ज़मीन पर आतंकवाद को बढ़ावा ना दें।हम चाहते हैं कि मुस्लमान भी आपस मिलकर रहें।ट्रम्प का ये बयान उनकी छवि के उलट शान्ति का पैगाम माना चाहिए।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें