मंगलवार, 1 अगस्त 2017

कुदरत और राजनीति की मार झेल रहा है गुजरात।

देश के चार राज्य बारिश और बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है।उनसे में एक राज्य है गुजरात।इस राज्य के कई ज़िले बारिश और बाढ़ से भयंकर रूप से प्रभावित है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताब़िक बनासकांठा और पाटन ज़िले के गांव ज़्यादा प्रभावित है।केन्द्र और राज्य सरकार के साझा सहयोग से राहत और बचाव कार्य ज़ारी है।SEOC यानि State Emergency operation center के रिपोर्ट के मुताब़िक बाढ़ से अबतक बनासकांठा में 61 और पाटन में सात लोग समेत 218 लोगों प्राकृतिक आपदा की वज़ह से मौत हो गई है।
लगातार हो रही बारिश से उत्पन्न हुई बाढ़ से 4.5 लाख़ लोग प्रभावित है।इसमें से अबतक 39000 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।वायुसेना, राष्ट्रीय और राजकीय आपदा मोचन बल के सहयोग से पिछले हफ़्ते 11400 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।लगातार हो रही बारिश से बचावकर्मियों को काफ़ी मुश्किलों का सामना कर रहा है।लेकिन मुश्किल हालात के बावजूद अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वाह कर रहें हैं।
ऊधर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी बनासकांठा और पाटन ज़िले में डेरा डाले हुए।रूपानी नें बताया की पाटन के 87 छतिग्रस्त सड़कों में से 58 सड़कों का मरम्मत कर दिया गया है और 153 चिकित्सा शिविर लगाये गये हैं।इण्डिया टुडे से बातचीत में रिलीफ़ कमांडर एजे शाह ने कहा कि आपदाग्रस्त इलाकों में राहत एंव बचाव का कार्य अब भी ज़ारी है और उम्मीद है मरने वालों की संख्या में इज़ाफ़ा नही होगा।
आपदा से इतर गुजरात राजनीतिक समस्या से भी जूझ रहा है।8 अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव में सिर्फ़ एक व्यक्ति को जिताने के लिए,कांग्रेस ने अपने 42 विधायकों को गुजरात से 1663.7 किमी दूर बैंगलोर के ईगलटोन रिसॉर्ट पहुंचा दिया है।इन 42 विधायकों में वो भी विधायक शामिल हैं,जिनका इलाका जलमग्न है।आपदाग्रस्त इलाके के विधायकों के लिए ये सबसे मुफ़ीद वक़्त था,पीड़ित लोगों की सहायता कर अपने और अपने पार्टी की विश्वसनीयता बहाल करने की।वो भी एक ऐसे वक़्त में जब देश के मात्र 6% आबादी पर कांग्रेस का शासन रह गया है।इन विधायकों को ये भी सोचना चाहिए था कि वो दुबारा वोट आधार पर मांगने जाएंगे?
रिसॉर्ट की वेबसाइट के मुताब़िक एक दिन के खाने और रहने का किराया न्यूनतम 7500 है।मीडिया रिपोर्ट के मुताब़िक इस रिसॉर्ट में एक विधायक ने अपने 12 साल के बेटे के जन्मदिन के अवसर पर 50 किलो का केक मंगवाया,साथ अॉर्केस्टा के साथ कॉकटेल डिनर पार्टी का आयोजन भी आयोजन किया।मगर आठ लोगों ने ही मंदिरापान किया।गुजरात वैसे भी ड्राई स्टेट है।
इन सब के बीच,एक तरफ़ जिस व्यक्ति को राज्यसभा में पहुंचाने के लिए विधायकों को परमानंद की प्राप्ति कराई जा रही है,उस व्यक्ति को ख़ुद बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाना पड़ा।सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल(राज्यसभा उम्मीदवार) और अशोक गहलोत ने बनासकांठा इलाके का दौरा किया और पटेल ने अपने दौरे की फ़ोटो ट्वीट करते हुए, राज्य सरकार के राहत एवं बचाव कार्य की आलोचना करते हुए कहा की,इसकी रफ़्तार बहुत ही धीमी है।वहीं दूसरी तरफ़ राज्यभा में गुलाम नबी आज़ाद ने भी इस मुद्दे को उठाया।पटेल और गहलोत के बाद,बाढ़ प्रभावित इलाकों में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी गई।बीजेपी ने कांग्रेसी विधायकों के बैंगलोर जाने को मुद्दा बनाया है।केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके विधायक मौज-मस्ती कर रहे हैं,जबकि भाजपा के विधायक बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत मुहैया कराने में व्यस्त हैं।उन्होंने आगे कहा कि गुजरात कांग्रेस के नेता बेंगलुरु में भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं।यह उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली बात हो गई।यदि उनके विधायक ख़ुद उन्हें छोड़कर आकर रहे हैं,तो इसका हमसे कोई लेना देना नही है। 30 जुलाई को कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने रिसॉट में अपने सभी विधायकों के साथ प्रेस कॉफ्रेंस कर बताया कि हमारे विधायक यहां मौज-मस्ती करने नही आए हैं,बल्कि लोकतंत्र को बचाने आए हैं।भाजपा उनके विधायकों को धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल का इन्हें ख़रीदने की कोशिश कर रही है। गुजरात में कांग्रेस के कुल 57 विधायक थे, जिनमे से 6 ने पिछले दो दिनों में इस्तीफ़ा दे दिया है।उनमें से 3 ने 28 जुलाई को भाजपा का दामन धाम लिये। 7 अन्य बेंगलुरु में ठहरे विधायकों के समूह में शामिल नही हैं।गोहिल ने उम्मीद जताई की वे अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनेंगे और कांग्रेस के ख़िलाफ़ वोट नही करेंगे। बीजेपी हमारे 22 विधायकों ख़रीदने की कोशिश कर रही है।लेकिन हमारे विधायक एकजुट हैं।कांग्रेस आजकल अपने नेताओं को 'अंतरात्मा की आवाज़' सुनने की बात कर रही है। राष्ट्रपति चुनाव में भी मीरा कुमार ने अंतरात्मा की आवाज़ सुनने की बात कही थी। गोहिल को जब अपने विधायकों पर इतना ही भरोसा है तो विधायकों को बैंगलुरू क्यों पहुंचा दिए?

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