'राजनीति में नेताओं की सियासी समस्या ही आपकी भी बुनियादी समस्या है,नेताओं की बड़ी-बड़ी बातें आपकी समस्यों का समाधान है',न्यूज़ चैनल के अनुसार।यदि आप न्यूज़ चैनलों को ध्यान से देखेंगे तो उपरोक्त बात आसानी से समझ आ जाएगी। ऐसा नही है कि ये सिर्फ़ हिन्दुस्तान में ही हो रहा है और वो भी आज़कल हो रहा है।दुुनिया के किसी भी देश में न्यूज़ चैनल्स, उदय के कुछ दिनों बाद से ही पत्रकारिता छोड़ दलों के प्रवक्ता के रुप में काम करने लगें।राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की पलपल की जानकारी आप तक पहुंचाने लगे। बीच-बीच में अपनी विश्वसनीयता कायम रखने के लिए कुछ जन समस्याओं को दिखाकर,धीरे-धीरे आपको अपना शिकार बना लिए,जो आज सामने है। टीवी में एक नये प्रारुप का आगमन हुआ,जिसको 'डिबेट शो' के नाम से जाना जाता है।डिबेट शो का आगमन किसी भी मुद्दे पर अलग-अलग जानकारों की राय से एक निष्कर्ष पर पहुुचने के लिए हुआ था,लेकिन ये फॉरमेट भी राजनीति का शिकार हो गया।आज आलम ये है कि किसी भी मुद्दे पर डिबेट हो,किसी भी दल का एक ही प्रवक्ता सभी विषयों पर बोल देगा,समस्या चाहे हिन्दुस्तान के किसी भी कोने का हो।भले ही वो दिल्ली से या फ़िर अपने शहर से कई महीनों से निकला ना हो।अब डिबेट शो में तो अपशब्दों का भी इस्तेमाल होने लगा है।
एक ऐसे वक्त में जब डिबेट शो राजनीति से ग्रसित हो गया है, कुछ अभी भी डिबेट शो है जहां जनहित की लिए शान्ति से बात होती है।उसी में से एक है एनडीटीवी इण्डिया का 'प्राइम टाइम' शो।प्राइम टाइम के एंकर हैं रविश कुमार।जिनकी कोशिश होती है कि बहस के दौरान मुद्दे के कई पक्षों पर बात हो।गुरुवार को उन्होंने अपने कार्यक्रम में सीवर सफ़ाईकर्मियों की लगातार हो रही मौत के कारणों पर स्टुडियों में बुलाकर बात की। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात ये है कि इसमें सिर्फ़ बोलने वाले यानि किसी दल के प्रवक्ता नही थे़ं। कार्यक्रम का लिंक भी दे रहा हूूं।
https://www.youtube.com/watch?v=PvQlXa2bOsM

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