गुरुवार, 3 अगस्त 2017

नीतीश जी:दाग अब भी लगे हैं!

दिन 26 जुलाई 2017,शाम का वक्त, राष्ट्रीय मीडिया की नज़र बिहार पर।क्योंकि इस शाम से अगली शाम तक भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जा रहा था,एक व्यक्ति की साफ़-सुथरी छवि बनाये रखने के लिए।इस अध्याय में कई ऐसी चीजें लिखीं गई,जो अबतक की राजनीति में एक बानगी है।जैसे नीतीश कुमार छठी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले अबतक के एकमात्र मुख्यमंत्री बने।सबसे अल्प समय तक मुख्यमंत्री ना रहने वाले मुख्यमंत्री बने।अपने पुरानी साथी से हाथ मिलाने जा रहे थे,जिससे साल 2013 में यह कहते हुए नाता तोड़ दिया था कि 'मिट्टी में मिल जाऊंगा, लेकिन दुबारा कभी नाता नही जोड़ूंगा।'इस शाम नीतीश ने उस गठबंधन से नाता तोड़ दिया,जिसकी बुनियाद सांप्रदायिक ताकतों के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए रखी थी।महज़ 20 महीने में उसी सांप्रदायिक ताकत से हाथ मिला लिए,जिससे लड़ने के लिए ख़ुद के सहयोग से एक गठबंधन का निर्माण किया था।इस गठबंधन से अलग होने के बाद उनके कई उपनाम भी अस्तित्व में आए।जैसे-कुर्सी कुमार,पलटूराम,रणछोड़ इत्यादि।
अपने वर्तमान साथी भाजपा से साल 2013 में नाता तोड़ते वक़्त नीतीश कुमार ने कहा था कि ये निर्णय सिद्धांत के आधार पर लिया गया है।भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी है।आइए एक नज़र डालते हैं दोनों साथियों के साल 2013 से लेकर 2015 तक के उन कुछ वचनों पर ताकि आपको तय करने में आसानी हो जाए की राजनीति में नैतिकता का क्या महत्व होता है।नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार चुने जाने पर नीतीश ने कहा था कि भाजपा एक ऐसे उम्मीदवार को चेहरा बना रही है,जिसका नाम सुनते ही देश के करोड़ों अल्पसंख्यकों में भय उत्पन्न हो जाता है।नीतीश ने नरेंद्र मोदी की तुलना हिटलर से की थी।सुशील मोदी ने नीतीश को धोखेबाज़ कहा था।नरेन्द्र मोदी ने नीतीश को अवसरवादी नेता कहा था।
हाल ही में 26 जुलाई को गठबंधन से अलग होते वक़्त साफ़ -सुथरी छवि के जाने जाने वाले नीतीश ने कहा था कि मैंने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में ये कदम उठाया है और अगले ही दिन भाजपा के सहयोग से सरकार बना लिए।आइए एडीआर के रिपोर्ट की मदद से जानते हैं कि राजद-कांग्रेस के गठबंधन वाले नीतीश मंत्रिमंडल में कितने दागी मंत्री थे और अब भाजपा के सहयोग से बनी मंत्रिमंडल में कितने दागी हैं।एडीआर ने ये रिपोर्ट नेताओं द्वारा चुनाव आयोग में दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे के आधार पर तैयार किया है।
एडीआर(एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म) एक संस्था है,जिसको कह सकते हैं कि ये राजनीतिक प्रणाली को दूरूस्त करने के लिए काम करती है।इसकी स्थापना 1999 में आईआईएम, अहमदाबाद के प्रोफेसरों ने मिलकर की है।
रिपोर्ट की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ही करते हैं।साल1991 में एक मर्डर केस में उन पर हत्या,हत्या की कोशिश, दंगा भड़काने और आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज़ है।
                             उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर मानहानि, शान्ति भंग करने और आपराधिक साज़िश के केस दर्ज़ है।ऐसे ही नीतीश के वर्तमान मंत्रिमंडल के कई नेताओं पर चोरी, धर्म, जाति,लिंगभेद के आधार पर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने ,घर में घुस कर चोरी,रंगदारी, धोखाधड़ी, सम्पत्ति, बेईमानी, आपराधिक धमकी और जालसाजी जैसे  मामले दर्ज़ हैं।नीतीश के वर्तमान 29 सदस्यीय मंत्रिमंडल का हाल-
👉मंत्रिमंडल में 22(76%)मंत्रीयों पर आपराधिक मामले में केस दर्ज़ है।जिनमें से 9 पर जघन्य अपराध के आरोप हैं।जबकि पिछली सरकार में 19(68%) मंत्रियों पर आरोप थे।
👉मंत्रिमंडल में 21(76%) करोड़पति,जबकि पिछली सरकार में22(79%)थें।
इस सरकार में सबसे ज़्यादा और सबसे कम सम्पत्ति वाले मंत्री भाजपा के ही हैं।जिनके पास सबसे ज़्यादा सम्पत्ति है,वो हैं लखीसराय से भाजपा विधायक विजय कुमार सिन्हा।इनके पास 15.64 करोड़ की सम्पत्ति है।इनकी चल सम्पत्ति 9,81,72,626 और अचल सम्पत्ति 5,82,38,000 है।
इसी सरकार में सबसे कम सम्पत्ति वाले हैं मंगल पाण्डेय,जो कि भाजपा से एमएलसी हैं।इनके पास अचल सम्पत्ति है 0 और चल सम्पत्ति है 49,93,582।
👉इस मंत्रिमंडल में एक महिला मंत्री है,जबकि पिछली सरकार में दो महिला मंत्री थी।

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