सोमवार, 7 अगस्त 2017

सोशल मीडिया की वज़ह से जनता और सरकार में सीधा संवाद हो रहा है?

"सोशल मीडिया की वज़ह से जनता और सरकार के बीच सीधा संवाद हो रहा है।"ये कहना है मेरे एक मित्र का।मेरे मित्र के इस बयान से कई लोग सहमत भी होंंगे, तो कई लोग मेरी तरह असहमत भी।उनके इस बयान का आधार क्या-क्या हो सकता है,ये जानने की मैंने कोशिश की।मैंने अपने गांव और शहरों में रहने वाले कई साथियों से इस सन्दर्भ में बात कि जो स्मार्टफ़ोन,टैबलेट, डेस्कटॉप या लैपटॉप का इस्तेमाल 2014 के पहले के कई सालों से इस्तेमाल करतें आ रहें हैं। इन तमाम डिवाइस वाले साथियों से इसलिए बात कि,क्योंकि मसला सोशल मीडिया से जुड़ा है।वो भी एक ऐसे वक़्त में जब सोशल मीडिया अफ़वाहों का अड्डा बन गया है।हकीकत से रूबरू होने के लिऐ एक असाधारण कोशिश आपको भी करनी चाहिए।अपने ही सोशल मीडिया को पूरा छान मारिये, ताकि पता चल की हकीकत क्या है।यदि आपका संबंध गांव से है तो ,अपने गांव के 10 लोग(सभी वर्ग के) से सोशल मीडिया के बारे में पूछिए।इसके अलावा मैंने गूगल की भी मदद ली।इस विषय के शोधपरक हिन्दी और इंग्लिश के कई वेबसाइटों को पढ़ा,ताकि कोई तो ऐसी बात पता चले जिससे लगे की सरकार जनता से सीधे संवाद कर रही है।इन तमाम कोशिशों के बावजूद जिस निष्कर्ष पर मैं पहुंचा, उससे लगा कि मैं उनके सोचने के स्तर तक नही पहुंच पाया।उम्मीद करता हूं कि उनसे जब इस मुद्दे पर बात होगी तो जानने की कोशिश करूंगा कि उनके कहने का आधार क्या था।
बहरहाल मैं अपनी असहमति के पक्ष में कुछ शोधपरक आकड़ों को प्रस्तुत कर रहा हूं।तमाम वेबसाइटों को पढ़ने के बाद एक मुख्य बात जो सामने आई वो ये कि सब कुछ 'उम्मीद' पर टिका हुआ है,वो भी साल 2020 तक।लेकिन अभी जो हालात है वो बहुत बद्दतर है।मैंने दो बातों को शोध का आधार बनाया।पहला कितने लोग स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करते हैं और दूसरा कितने लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं।क्योंकि ये दोनों बातें एक दूसरे के पूरक हैं और सोशल मीडिया का वजूद ही इन बातों से है।शोध करते वक़्त मैंने पूरी सावधानी बरती है।फ़िर भी यदि कोई चूक हो गई हो तो पहले से क्षमा।क्योंकि मेरा मकसद सिर्फ़ हकीकत को आपके सामने लाना है,क्योंकि सिर्फ़ बातों से बात नही है।
शोध के किसी भी बिन्दु को पढ़ते वक़्त भारत की जनसंख्या को ध्यान में रखिएगा।2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,210,193,422 है।worldometers के अनुसार 6 अगस्त 2017 तक भारत की आबादी 1,343,961,178 है,जिसका 32.8% हिस्सा यानि 439,801,466 लोग शहर में निवास करते हैं।
worldometer एक वेबसाइट है जो दुनियाभर के जनसंख्या की जानकारी देता है।
▶द मोबाइल इकोनॉमी इण्डिया 2016 के अनुसार जून-2016 तक भारत के 27.50 करोड़ लोग स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करते हैं।उम्मीद लगाई जा रही है कि 2020 तक देश के 68% आबादी के पास स्मार्टफ़ोन होगा।वर्तमान में 61.6% लोग मोबाइल यूजर्स हैं।वर्तमान में देश में देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 34 करोड़ 30 लाख है,जो कुल आबादी का 27% है।जहां 2020 तक यह संख्या बढ़कर 60 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है।
▶टू बैलेंस मोबाइल एप ने 01 अगस्त 2017 को एक रिपोर्ट में बताया कि पिछले 8 महीने में भारत में मोबाइल डाटा का इस्तेमाल बढ़ा है।इसके बावजूद भी भारत में 56% स्मार्टफ़ोन यूजर्स के पास इंटरनेट की सुविधा नही है।इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में इंटरनेट की कनेक्टिविटी आज़ भी काफ़ी ख़राब है,जिसके चलते यूजर्स इस्तेमाल नही कर पाते है।
▶एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सोशल मीडिया में से सबसे ज़्यादा इस्तेमाल फ़ेसबुक का होता है।इसको इस्तेमाल करने वाले ज़्यादातर 18-24 साल के युवक हैं।इसमें से भी 76% प्रतिशत उपभोक्ता पुरूष हीं हैं।मात्र 24% महिला ही फ़ेसबुक इस्तेमाल करतीं हैं।
दूसरे नम्बर पर ट्विटर आता है।जिसके मात्र 17% उपभोक्ता हैं।
इंस्टाग्राम को इस्तेमाल करने वाले भारत मे 71% पुरूष और मात्र 29% महिलाएं इस्तेमाल करतीं हैं।इसके सबसे ज़्यादा सक्रिय उपभोक्ता दिल्ली और मुंबई में हैं।उपयोगकर्ता में 60% कॉलेज के लड़के-लड़कियां हैं।
इसके अलावा लिंक्डइन, युट्यूब, मैसेन्जर वगैरह है।
                             अब आप ही सोचिए कि जिस देश की पूरी आबादी के पास स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट की सुविधा नही है।भाषाई अंतर तो है ही।वहां ये कहना कि 'सोशल मीडिया की वज़ह से जनता और सरकार में सीधा संवाद हो रहा है' कितना न्यायोचित है?मेरे मित्र का यह बयान जनहित में सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर कटाक्ष करते हुए आया है।उनका तर्क है कि सवाल पूछने वालों पत्रकारों को सरकार ज़वाब क्यूँ दे,जब सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से सीधा संवाद हो ही रहा है।वो ये कहते हुए भुल गयें कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है,जिसका काम ही है सवाल पूछना ना कि सरकार की चाटुकारिता करना।

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