'समस्या मुक्त' राज्य गुजरात में विधान सभा के चुनाव का बिगुल बज चुका है। राज्य की 4 करोड़ 33 लाख जनता अपने मत का इस्तेमाल कर अपने-अपने रहनुमाओं को चुनेगी। मतदान दो चरणों में होगा।9 दिसम्बर को होने वाले पहले चरण के मतदान में 89 सीटों पर,तो वहीं 14 दिसम्बर को दूसरे चरण में 94 सीटों पर मतदान होगा।18 दिसम्बर को आधिकारिक रूप से नवनिर्वाचित रहनुमाओं का ऐलान हो जाएगा।इस बार 102 बूथों पर महिला पोलिंग स्टाफ़ तैनात होंगी। मैंने 'समस्या मुक्त' शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया है, क्योंकि आज़ तक मैं गुजरात नहीं गया। लेकिन जिस तरीके से राष्ट्रीय पटल पर सरकारी रूप से या मीडिया रिपोर्ट्स में गुजरात को पेश किया जाता है।मेरे ही जैसे देशभर के वैसे लोग जो कभी गुजरात नहीं गये,शायद यही समझेंगे की गुजरात एक समस्या मुक्त राज्य है। मैंने कई सारे रिपोर्ट्स पढ़े,सम्भव हो तो आप भी पढ़िए।आप पायेंगे की इस बार का गुजरात में सिर्फ़ जाति आधारित है।
चुनाव का आधिकारिक ऐलान तो 25 अक्टूबर को हुआ। लेकिन इसकी तैयारी में करीब एकाध-डेढ महीने पहले से ही नेता जुट गये थे।।पीएम मोदी और राहुल गांधी का ताबड़तोड़ गुजरात दौरा इस बात का प्रतीक है।चुनाव में हाफ़िज़ सईद,आईएस, आतंकवादी, कश्मीर की आज़ादी की एन्ट्री करा दी गई है।क्योंकि यही गुजरात की समस्या है।आप घबराइए नहीं,हम दुनिया से सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं,हमारे यहां चुनाव करने का पैमाना सिर्फ़ 'बोलने में विकास दिखना चाहिए' है।समस्याओं पर बात तक करना गुनाह माना जाता है।गुजरात के सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं द्वारा की जा रही विकास-विकास की शोर सुनाई दे रही है, लेकिन जिसकी ज़िम्मेदारी है समस्याओं को लोगों के बीच लेकर जाने की है,वो(विपक्ष)गायब हैं या तो जातिगत वोटों की गोलबंदी में लगें हैं।क्योंकि उनको जातिगत राजनीति ही करीब 20 साल की सत्ताहीनता को दूर करने का एक मात्र उपाय नज़र आ रहा है।तभी तो कांग्रेस अपनी दम पर नहीं,बल्कि हार्दिक,जिग्नेश और अल्पेश भरोसे चुनाव जितने का खाब देख रही।कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस का हाल ये है कि वो राजनीति में पहली बार कदम रख रहे नेताओं के भरोसे है।आखिर ऐसी परिस्थिति क्यों आई? कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने एक नीति चैनल के डिबेट शो में एंकर के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये तीनों विकास की राजनीति करते हैं।कांग्रेस प्रवक्ता ऐसे बयान देकर किसको मुर्ख बना रहें थे?क्या हिन्दुस्तान की जनता इस बात को नहीं जानती है कि इन तीनों की आरक्षण पर क्या राय है?आख़िर प्रवक्ता ये बात कहने में क्यों हिचक रहे थे कि ये तीनों जाति की ही राजनीति करते हैं? चुनाव में राजनीति का पैमाना तो 'जाति' ही है। खैर इन तीनों से कांग्रेस को कितना फ़ायदा होगा आने वाला वक़्त बताएगा।
आज कल देश में खुद को मसीहा समझने वाला ज़्यादा लोग पैदा हो रहें हैं।इसके पीछे एकमात्र कारण है, लोगों ने खुद को किसी नेता की सोच के हवाले करना शुरू कर दिया है। मतलब लोगों ने सालों मेहनत कर अर्जित किए गये अपने ज्ञान को नेताओं के पास गिरवी रखना शुरू कर दिया है। गुजरात में हार्दिक पटेल को पाटीदारों का मसीहा माना जाता है। हार्दिक ने अपने उस पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग करते हुए सरकारी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया जो जहां भी हैं आर्थिक रूप से काफ़ी मज़बूत है।
-22 लाख एनआरआईज़ में 35 % गुजराती हैं जिनमें आधे से ज्यादा पटेल कम्यूनिटी के हैं।
-अमेरिका में मोटल बिजनेस पर एकाधिकार रखने वाले पटेल ही हैं।
-अमेरिकी हाइवे पर बने 70% होटल पटेलों के
ईस्ट अफ्रीका,मिडिल ईस्ट,यूके,आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पटेलों के बिजनेस एंपायर है।
-अकूत दौलत और बेशुमार जमीनों के स्वामी हैं पटेल समुदाय, खेती और कंस्ट्रक्शन इंड्रस्ट्री और व्यापार पेशे में शामिल हैं।
-राजकोट में फैली 12 हज़ार इंड्रस्ट्रियल यूनिट्स में से 40% पटेलों की है।
-सूरत की 4 हज़ार हीरा कटिंग यूनिट्स में से 70% पटेलों की है।
-मोरबी में स्थित भारत की सबसे बड़ी सेरेमिक इंड्रस्ट्री की 90 % पटेलों की है।
-मौजूदा सरकार में करीब 40 विधायक और 7 मंत्री पटेल समुदाय से हैं।
सुबे में पाटीदारों को किंग मेकर माना जाता है।पाटीदार मतदाता करीब 20 फ़िसदी है जिसका प्रभाव 70 सीटों पर है।
पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता जिग्नेश मेवानी ने 'आजादी कूच आंदोलन' में 20 हजार दलितों को एक साथ मरे जानवर न उठाने और मैला न ढोने की शपथ दिलाई थी।जिग्नेश की अगुवाई वाले दलित आंदोलन ने बहुत ही शांति के साथ सत्ता को करारा झटका दिया है।इस आंदोलन को हर वर्ग का समर्थन मिला था।आंदोलन में दलित मुस्लिम एकता का बेजोड़ नजारा देखा गया था। सूबे में करीब 7 फीसदी दलित मतदाता हैं।
ओबीसी चेहरा बने अल्पेश ठाकोर ने पटेल आरक्षण आंदोलन के विरोध में खड़े हुए थे और गुजरात के ओबीसी के नेता बन गए। अल्पेश ठाकोर गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना के अध्यक्ष के साथ-साथ ओबीसी एकता मंच के संयोजक भी हैं। अल्पेश ने अन्य पिछड़ा वर्ग के 146 समुदायों को एकजुट करने का काम किया है।एक रैली के दौरान अल्पेश ने धमकी दी थी कि अगर पटेलों की मांगों के सामने बीजेपी शासित गुजरात सरकार ने घुटने टेके तो सरकार को उखाड़ फेंका जाएगा।
हमने ऊपर गुजरात के नये त्रिमूर्ति के बारे में बताई कि इन्होंने अपनी पहचान कैसे बनाई है।क्या आपको कहीं नज़र आया कि इन लोगों ने विकास की राजनीति कर अपनी पहचान बनाई है?
चुनाव का आधिकारिक ऐलान तो 25 अक्टूबर को हुआ। लेकिन इसकी तैयारी में करीब एकाध-डेढ महीने पहले से ही नेता जुट गये थे।।पीएम मोदी और राहुल गांधी का ताबड़तोड़ गुजरात दौरा इस बात का प्रतीक है।चुनाव में हाफ़िज़ सईद,आईएस, आतंकवादी, कश्मीर की आज़ादी की एन्ट्री करा दी गई है।क्योंकि यही गुजरात की समस्या है।आप घबराइए नहीं,हम दुनिया से सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं,हमारे यहां चुनाव करने का पैमाना सिर्फ़ 'बोलने में विकास दिखना चाहिए' है।समस्याओं पर बात तक करना गुनाह माना जाता है।गुजरात के सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं द्वारा की जा रही विकास-विकास की शोर सुनाई दे रही है, लेकिन जिसकी ज़िम्मेदारी है समस्याओं को लोगों के बीच लेकर जाने की है,वो(विपक्ष)गायब हैं या तो जातिगत वोटों की गोलबंदी में लगें हैं।क्योंकि उनको जातिगत राजनीति ही करीब 20 साल की सत्ताहीनता को दूर करने का एक मात्र उपाय नज़र आ रहा है।तभी तो कांग्रेस अपनी दम पर नहीं,बल्कि हार्दिक,जिग्नेश और अल्पेश भरोसे चुनाव जितने का खाब देख रही।कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस का हाल ये है कि वो राजनीति में पहली बार कदम रख रहे नेताओं के भरोसे है।आखिर ऐसी परिस्थिति क्यों आई? कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने एक नीति चैनल के डिबेट शो में एंकर के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये तीनों विकास की राजनीति करते हैं।कांग्रेस प्रवक्ता ऐसे बयान देकर किसको मुर्ख बना रहें थे?क्या हिन्दुस्तान की जनता इस बात को नहीं जानती है कि इन तीनों की आरक्षण पर क्या राय है?आख़िर प्रवक्ता ये बात कहने में क्यों हिचक रहे थे कि ये तीनों जाति की ही राजनीति करते हैं? चुनाव में राजनीति का पैमाना तो 'जाति' ही है। खैर इन तीनों से कांग्रेस को कितना फ़ायदा होगा आने वाला वक़्त बताएगा।
आज कल देश में खुद को मसीहा समझने वाला ज़्यादा लोग पैदा हो रहें हैं।इसके पीछे एकमात्र कारण है, लोगों ने खुद को किसी नेता की सोच के हवाले करना शुरू कर दिया है। मतलब लोगों ने सालों मेहनत कर अर्जित किए गये अपने ज्ञान को नेताओं के पास गिरवी रखना शुरू कर दिया है। गुजरात में हार्दिक पटेल को पाटीदारों का मसीहा माना जाता है। हार्दिक ने अपने उस पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग करते हुए सरकारी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया जो जहां भी हैं आर्थिक रूप से काफ़ी मज़बूत है।
-22 लाख एनआरआईज़ में 35 % गुजराती हैं जिनमें आधे से ज्यादा पटेल कम्यूनिटी के हैं।
-अमेरिका में मोटल बिजनेस पर एकाधिकार रखने वाले पटेल ही हैं।
-अमेरिकी हाइवे पर बने 70% होटल पटेलों के
ईस्ट अफ्रीका,मिडिल ईस्ट,यूके,आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पटेलों के बिजनेस एंपायर है।
-अकूत दौलत और बेशुमार जमीनों के स्वामी हैं पटेल समुदाय, खेती और कंस्ट्रक्शन इंड्रस्ट्री और व्यापार पेशे में शामिल हैं।
-राजकोट में फैली 12 हज़ार इंड्रस्ट्रियल यूनिट्स में से 40% पटेलों की है।
-सूरत की 4 हज़ार हीरा कटिंग यूनिट्स में से 70% पटेलों की है।
-मोरबी में स्थित भारत की सबसे बड़ी सेरेमिक इंड्रस्ट्री की 90 % पटेलों की है।
-मौजूदा सरकार में करीब 40 विधायक और 7 मंत्री पटेल समुदाय से हैं।
सुबे में पाटीदारों को किंग मेकर माना जाता है।पाटीदार मतदाता करीब 20 फ़िसदी है जिसका प्रभाव 70 सीटों पर है।
पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता जिग्नेश मेवानी ने 'आजादी कूच आंदोलन' में 20 हजार दलितों को एक साथ मरे जानवर न उठाने और मैला न ढोने की शपथ दिलाई थी।जिग्नेश की अगुवाई वाले दलित आंदोलन ने बहुत ही शांति के साथ सत्ता को करारा झटका दिया है।इस आंदोलन को हर वर्ग का समर्थन मिला था।आंदोलन में दलित मुस्लिम एकता का बेजोड़ नजारा देखा गया था। सूबे में करीब 7 फीसदी दलित मतदाता हैं।
ओबीसी चेहरा बने अल्पेश ठाकोर ने पटेल आरक्षण आंदोलन के विरोध में खड़े हुए थे और गुजरात के ओबीसी के नेता बन गए। अल्पेश ठाकोर गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना के अध्यक्ष के साथ-साथ ओबीसी एकता मंच के संयोजक भी हैं। अल्पेश ने अन्य पिछड़ा वर्ग के 146 समुदायों को एकजुट करने का काम किया है।एक रैली के दौरान अल्पेश ने धमकी दी थी कि अगर पटेलों की मांगों के सामने बीजेपी शासित गुजरात सरकार ने घुटने टेके तो सरकार को उखाड़ फेंका जाएगा।
हमने ऊपर गुजरात के नये त्रिमूर्ति के बारे में बताई कि इन्होंने अपनी पहचान कैसे बनाई है।क्या आपको कहीं नज़र आया कि इन लोगों ने विकास की राजनीति कर अपनी पहचान बनाई है?

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