पीएम नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को 'दिशा' ऐप लॉन्च किया है।क्या आप इस ऐप के बारे में जानते हैं? यदि नहीं जानते हैं तो मैं आपको पीएम मोदी के शब्दों में बता रहा हूं।पीएम ने कहा कि सरकार की इस मोबाइल ऐप की मदद से हर व्यक्ति अपनी बात ऊपर तक पहुंचा सकता है।गुड गवर्नेंस को फ़ायदा मिलेगा। ग्रामीण भारत में चल रही योजनाओं के बारे मे सारी जानकारी मिलेगी।दिशा के माध्यम से जनप्रतिनिधी लोगों के साथ जुड़ जायेंगे।
डिजिटल की ओर अग्रसर इण्डिया में उपरोक्त बातों में से एक को छोड़कर सारी बातें तो ठीक है।वो एक अविश्वसनीय बात है जनप्रतिनिधी लोगों से जुड़ जाएंगे। सोचिए कितने व्यस्त है हमारे प्रतिनिधि कि अब ऐप के माध्यम से संबंध स्थापित किया जा रहा है।क्या आपको लगता है कि ऐप में उपलब्ध ये सुविधा कारगर हो पाएगा?साल 2014 में देश में सत्ता परिवर्तन हुआ।तब से लेकर आज तक सरकार के मुखिया कई बार कह चुके हैं कि सभी सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्र में हीं रहे। बेवजह सांसद और विधायक राजधानी में ना रहें। ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त लोगों के बीच रहकर समस्याओं का निपटारा करें।क्या आपको अब तक अपने सांसद और विधायक के रवैए में कोई बदलाव नज़र आ रहा है?आपकी समस्याओं को लेकर गंभीर हुए हैं?अपवाद को छोड़कर।सवाल ये है कि जनप्रतिनिधियों का लोगों के साथ,सिर्फ़ ऐप से जुड़ जाने से ही समस्या का समाधान हो जाएगा?वो भी ऐसे वक़्त में जब वोट के लिए नेता सिर्फ़ हिंदू-मुसलमान कर रहें हैं।
लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होता है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है हमारे देश में जनप्रतिनिधी ही अपने आप को सर्वोपरि मानने लगा है।इसके कारणों में सर्वश्रेष्ठ कारण है 'अंधभक्त' हो जाना है।पहले एक ख़ास रणनीति के तहत दल या नेता,आपके सही-ग़लत में फ़र्क करने की क्षमता को समाप्त कर देते हैं।वर्षों से अर्जित किए गए आपके ज्ञान को अपना भोंपू बना कर इस्तेमाल कर रहें हैं। साम्प्रदायिक बातों में फंसा कर,आपकी समस्याओं से भटका रहें हैं ताकि आपके पास समस्याओं को लेकर उनसे सवाल ही ना पूछ सके। इसमें सिर्फ़ हमारा(जनता) नुक़सान ही हो रहा है। इसलिए भक्ति छोड़, लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक बनिए और अपने प्रतिनिधि से ज़्यादा से ज़्यादा सवाल पुछिए।उसको इस बात का एहसास कराइए कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होता हैं ना कि जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला।
डिजिटल की ओर अग्रसर इण्डिया में उपरोक्त बातों में से एक को छोड़कर सारी बातें तो ठीक है।वो एक अविश्वसनीय बात है जनप्रतिनिधी लोगों से जुड़ जाएंगे। सोचिए कितने व्यस्त है हमारे प्रतिनिधि कि अब ऐप के माध्यम से संबंध स्थापित किया जा रहा है।क्या आपको लगता है कि ऐप में उपलब्ध ये सुविधा कारगर हो पाएगा?साल 2014 में देश में सत्ता परिवर्तन हुआ।तब से लेकर आज तक सरकार के मुखिया कई बार कह चुके हैं कि सभी सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्र में हीं रहे। बेवजह सांसद और विधायक राजधानी में ना रहें। ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त लोगों के बीच रहकर समस्याओं का निपटारा करें।क्या आपको अब तक अपने सांसद और विधायक के रवैए में कोई बदलाव नज़र आ रहा है?आपकी समस्याओं को लेकर गंभीर हुए हैं?अपवाद को छोड़कर।सवाल ये है कि जनप्रतिनिधियों का लोगों के साथ,सिर्फ़ ऐप से जुड़ जाने से ही समस्या का समाधान हो जाएगा?वो भी ऐसे वक़्त में जब वोट के लिए नेता सिर्फ़ हिंदू-मुसलमान कर रहें हैं।
लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होता है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है हमारे देश में जनप्रतिनिधी ही अपने आप को सर्वोपरि मानने लगा है।इसके कारणों में सर्वश्रेष्ठ कारण है 'अंधभक्त' हो जाना है।पहले एक ख़ास रणनीति के तहत दल या नेता,आपके सही-ग़लत में फ़र्क करने की क्षमता को समाप्त कर देते हैं।वर्षों से अर्जित किए गए आपके ज्ञान को अपना भोंपू बना कर इस्तेमाल कर रहें हैं। साम्प्रदायिक बातों में फंसा कर,आपकी समस्याओं से भटका रहें हैं ताकि आपके पास समस्याओं को लेकर उनसे सवाल ही ना पूछ सके। इसमें सिर्फ़ हमारा(जनता) नुक़सान ही हो रहा है। इसलिए भक्ति छोड़, लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक बनिए और अपने प्रतिनिधि से ज़्यादा से ज़्यादा सवाल पुछिए।उसको इस बात का एहसास कराइए कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होता हैं ना कि जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला।

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