रविवार, 19 मार्च 2017

वादाख़िलाफ़ी ना करना सेवकों

5 राज्यों में लोकतंत्र का महापर्व शनिवार(11 मार्च)को समाप्त हो गया।पीएम नरेन्द्र मोदी के शब्दों में,इस महापर्व में मणिपुर,उत्तराखंड,गोवा,पंजाब और यूपी ने अपना राजकीय सेवक चुन लिया है।बीते दो शनिवार के बीच में गोवा को मनोहर पर्रिकर,उत्तराखण्ड को त्रिवेन्द्र सिंह रावत,पंजाब को कैप्टन अमरिन्दर सिंह,मणिपुर को एन बीरेन सिंह और यूपी को योगी आदित्यनाथ के रुप में सीएम रुपी सेवक मिल गया है।ये सभी राज्य इनके कार्यकाल में कितना विकास कर पाएंगे,ये आने वाला वक्त बताएगा।लेकिन जनता ने इस चुनाव में सत्ता गवां चुकी पार्टीयों को सबक तो सिखा ही दिया,साथ ही सत्ता हासिल कर चुकी पार्टीयों को भी संकेत दे दिया है कि सत्ता का गुरुर आप ना करेंगे।यूपी में सपा,पंजाब में अकाली+बीजेपी और उत्तराखण्ड में कांग्रेस की भारी पराजय ने बता दिया कि यहां कि जनता उनके शासन से खुश नही थें,साथ ही गोवा में बीजेपी और मणिपुर में कांग्रेस की सरकार होते हुए भी स्पस्ठ बहुमत ना मिलना भी ये बता रहा है कि वहां के लोग भी अपनी सरकार से खुश नही थें।भाषाई और भौगोलिक दूरी से लेकर तमाम संसाधनों के कारण दिल्ली से चलने वाली स्थानीय किन्तु राष्ट्रीय कहलाने वाले चैनलों की दुनिया में हमेशा की तरह मणिपुर को लोकतंत्र के महापर्व में भी प्रमुखता से जगह नही मिली,जिसके कारण वहां हो रही राजनीति हलचल की स्पस्ठ और पुर्ण जानकारी नही मिल पाई,जिससे पता चल सके की वहां के नेताओं की भाषाई स्तरता क्या है और जनता उनको कैसे देखती है।उम्मीद है बाकि 4 राज्यों में हुए चुनाव के बारे में तो बताने की ज़रुरत ही नही है।पीएम से लेकर सीएम और स्टार प्रचारक से लेकर फ़ायर ब्राण्ड नेताओं की बयानबाज़ी और बदजुबानी ही न्यूज़ चैनलों की टीआरपी में सहयोगी बनी।यह दौर अख़बारों और वेब पत्रकारिता करने वालों के लिए भी स्वर्णिम दौर रहा। खैर अब मैं चुनावी मोड से निकलकर घोषणा-पत्र में किए गए वादों पर,आपसे बतिया रहा हूं।इस लम्बे लेख का मकसद है,इन 5 राज्यों के सत्ताधारियों के वादों में से मुख्य वादों को सामने लाना।
पाचों राज्य में सत्ता हासिल कर चुकी पार्टीयों के घोषणा-पत्र को जब पढ़ रहा था तो एक बड़ी दिलचस्प जानकारी हासिल हुई वो ये कि जिस राज्य का घोषणा-पत्र था,उसका प्रमुख जारीकर्ता का संबंध उस राज्य के राजनीति से प्रत्यझ रुप से था ही नही बल्कि आयातित व्यक्ति था।जैसे- यूपी बीजेपी के घोषणा-पत्र के प्रमुख जारीकर्ता अमित शाह, वैसे ही पंजाब कांग्रेस के मनमोहन सिंह,उत्तराखण्ड बीजेपी के वित्तमंत्री अरुण जेटली और गोवा बीजेपी के महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडनवीस और मणिपुर के विज़न डॉक्यूमेंट के जारीकर्ता थें गृहमंत्री राजनाथ सिंह।अब पांचों राज्यों में सत्ता पर काबिज़ हो चुकी पार्टियों द्वारा चुनावी दौर में किए गये वादों को भुलते हुए, सिर्फ़ घोषणा-पत्र में किए गए वादों में से प्रमुख वादों के बारे में बात कर रहा हूं। शुरुआत करने से पहले याद दिला दूं कि किसानों की समस्याएं,ग़रीबी और रोज़गार का मुद्दा समस्या कम,राजनीतिक विषय ज़्यादा हैं।यूपी,उत्तराखण्ड और पंजाब के घोषणा-पत्र में लैपटॉप, इंटरनेट डाटा और मोबाइल फ़ोन का जलवा रहा।
आइए शुरुआत करते हैं उत्तर प्रदेश से-
यहां के चुनाव में विकास की बातों को छोड़कर गदहा,श्मशान,बिजली,होली,दिवाली ईद,बाथरुम,कुत्ता,हिजड़ा वगैरह-वगैरह से संबंधित वाक्यों का बोलबाला रहा है। खैर हम बात करते हैं घोषणा-पत्र की।
बीजेपी अध्यझ अमित शाह ने घोषणा-पत्र लोक कल्याण संकल्प पत्र जारी करते अपने उद्देश्य ना गुंडा राज ना भ्रष्टाचार के तहत 45 दिनों के अंदर सभी गुण्डों और भू-माफ़ियाओं को जेल में बन्द करने,100% नौकरी में से युवाओं को 90%,लैपटॉप के हर माह 1जीबी मुफ़्त इंटरनेट डाटा,50% से ज़्यादा अंक हासिल करने वाले सभी विद्याधियों को स्नातक तक मुफ़्त शिक्षा,गरीब परिवार में हर बच्ची के जन्म पर 5000 रुपया,बिना उम्र सीमा के विधवाओं को 1000 रुपया पेंशन,आगामी पांच साल में हर घर में गैस और शौचालय की सुविधा के साथ 150 करोड़ रुपया कृषि के विकास में ख़र्च करने का वादा किया है।
अब बात करते हैं पंजाब की-
पंजाब का घोषणा-पत्र विज़नरी डॉक्यूमेंट दिल्ली से जारी करते हुए पुर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा कि अकाली-बीजेपी के लूट,बुट और शुट की नीति के तहत 10 साल के कार्यकाल में बर्बाद हो चुकी राज्य को कैप्टन अमरिन्दर सिंह बचायेंगे।कैप्टन द 9 नुक्ते के तरह नशे की समस्या से जुझ रही पंजाब को 4 हफ़्ते के भीतर नशा मुक्त पंजाब के निर्माण का,यदि किसी को विश्वास नही हो तो स्टाम्प पेपर पर मुहर लगाकर देने का वादा किया था।सरकार गठन हो चुकी है,आने वाले 4 हफ़्ते में अमरिन्दर के इस फौलादी वादे का पता लग जाएगा।आगे उन्होंने अपने सहित अपनी विरादरी का ख़्याल ना रखते हुए वीआईपी कल्चर को समाप्त करने,आगामी 5 साल में 25-26 लाख़ युवाओं को रोज़गार देने और रोज़गार ना मिलने तक 2500 रुपये हर युवाओं को देने,बेघर दलितों और पिछड़ों को मुफ़्त में गृह उपलब्ध कराने का वादा किया है।
अब बात करते हैं उत्तराखण्ड की-
बीजेपी के स्टार प्रचारक और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केन्द्र में भी अपनी सरकार होने का हवाला देते हुए कहा कि यदि उत्तराखण्ड में भी हमारी सरकार बनेगी तो यहां के लोगों को ज़्यादा फ़ायदा होगा।आगे उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य राज्य के अंतिम व्यक्ति का सम्पुर्ण विकास करना है।भ्रष्टाचार मुक्त सरकार,बेहतर शिक्षा और रोज़गार उपलब्ध कराने का वादा किया है।
अब बात करते हैं गोवा की-
यहां के घोषणा-पत्र को पढ़ते हुए बाकि राज्यों से बिल्कुल अलग लगा।  शिक्षा,रोज़गार और विकास तो मुख्य मुद्दा है ही,यहां का कैसिनो भी राजनीति का मुद्दा है।तमाम पार्टियों के उल्ट तत्कालीन सीएम लक्ष्मीकान्त पारसेकर ने कहा कि यदि कैसिनो वाले सभी कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हैं,तो उन्हें हम हटा नही सकते हैं।यदि ऐसा करेंगे तो वे न्यायालय में चैलेज करेंगे,जो सरकार के चेहरे पर जोरदार तमाचा होगा।महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फ़डनवीस ने घोषणा-पत्र ज़ारी करते हुए कहा कि पर्यटन के अलावा निवेश योग्य कारखानों, सुचना तकनीक और कृषि आधारित कार्य क्षेत्र का निर्माण करेंगे।
और अब बात करते हैं मणिपुर की-
यहां पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ बीजेपी महासचिव राममाधव ने विज़न डॉक्यूमेंट-2017 जारी करते हुए यहां के लोगों को भाजपा को एकमात्र सहारा बताया।सभी को पेयजल,स्नातक तक महिलाओं को मुफ़्त शिक्षा,सभी बेघरों को घर देने का वादा किया है।साथ ही कहा कि क्षेत्रीय अखण्डता,संस्कृति और लोगों की सुरक्षा का वादा किया है।आगे उन्होंने राजमार्ग सुरक्षा बल के गठन पर जोर दिया।

                           अन्त में इन 5 राज्यों के जनता से यही कहना चाहता हूं कि सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अपनी तरफ़ से कोशिश कीजिए।

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