गुरुवार, 9 मार्च 2017

एग्जिट पोल:काल्पनिक खुशी और गम का !

'एग्जिट पोल:कही किसी के लिए खुशी तो कही किसी के लिए गम',वाले शो की झलक विभिन्न न्यूज़ चैनलों के माध्यम से आज आप सब ने देखा। करीब-करीब 5 घंटे तक चले ये शो,राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को मतगणना से पहले काल्पनिक खुशी और गम प्रदान करने वाला था।आज जिन लोगों को खुशियां हाथ लगी है वो कम से कम 10 तारीख़ तक तो आन्नदित रह सकते है और जिनको गम हाथ लगी है,उनको बिल्कुल भी उदास रहने की ज़रुरत नही है।क्योंकि वास्तविक खुशी और गम का तो 11 तारीख़ को होने वाले मतगणना के बाद ही पता चलेगा।
एग्जिट पोल में ज़्यादातर बार देखा गया है कि मतगणना से उलट इसका फ़ैसला होता है।अपवाद की बात नही कर रहा हूं।एग्जिट पोल क्या है,कैसे काम करता है और क्यों किया जाता है?उम्मीद है बताने की ज़रुरत नही,क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जिन 5 राज्यों में चुनाव हुए हैं वहां के ज़्यादातर मतदाता राजनीति में दक्षता हासिल होने का दावा करते हैं।फ़िर भी जिनको जानकारी नही है,उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि यू-ट्यूब पर एग्जिट पोल के तमाम स्टिंग के विडियो पड़े हैं,उसको देख जानकारियां हासिल कर लें।मैंने भी इन्ही विडियोस और वरिष्ठों के बतकही से थोड़ी बहुत जानकारी हासिल किया है।
अब एग्जिट पोल के दिलचस्प बातों के बारे में आपसे बात करता हूं।यदि आपने पूरे एग्जिट पोल को गौर से देखा होगा तो पाया होगा कि कोई दल तो इसको सिरे से हीं खारिज़ कर देता,तो कोई दल जहां उसको कम या बहुमत हासिल नही होता है उसको मानने से इनकार कर देता और यदि इसी दल को कहीं बहुमत हासिल होता है तो उसको स्वीकारते हुए और अधिक मत हासिल करने की बात करता है।राजनीतिक पंडित भी इस बात को कहते हुए अनुमान लगाते हैं कि मतगणना के दिन ही वास्तविकता का पता चलता है।लगभग हर चुनाव में एग्जिट पोल करने वाली कई कम्पनियां आस्तित्व में आती है।

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