सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पहले हीं स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव बाद गठबंधन का नेता तय होगा। सपा के नेता कह रहें हैं कि गठबंधन बनने से पहले कांग्रेस कैसे पीएम उम्मीदवार की दावेदारी कर सकती है?
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के शहीदी दिवस पर कह दिया है कि 2019 का लोकसभा चुनाव बंगाल में अकेले लड़ेगी।
बसपा प्रमुख मायावती ने तो कह दिया है कि उनकी पार्टी तब हीं गठबंधन में चुनाव लड़ेगी,जब सम्मानजनक सीटें मिलेंगी। ऐसे में मायावती के लिए सम्मानजनक सीट का मतलब कितना है,ये अभी साफ़ नही है।
एनसीपी ने अभी तक साफ़ नहीं किया है कि आम चुनाव से पहले गठबंधन पर उसकी क्या राय है। लेकिन वो इस बात से सहमत है कि जो सबसे बड़ी पार्टी होगी, उसका नेता पीएम बनेगा। एक नीजि चैनल से बातचीत में तारिक अनवर ने 2004 का हवाला देते हुए कहा है कि लोकतंत्र का तकाज़ा है कि जो सबसे बड़ी पार्टी होगी,नेतृत्व उसी को देना होगा।
जेडीएस और राजद की मिलीजुली राय है। दोनों को कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव लड़ने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन तेजस्वी ने एक शर्त रखी है। तेजस्वी का कहना कि जो संविधान बचाएगा,उसका समर्थन करेंगे। तेजस्वी की ये शर्त बताती है कि लोकतंत्र को लेकर उनकी समझ स्पष्ट नहीं है। तेजस्वी को जिस कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव लड़ने में कोई परेशानी नहीं है, वही कांग्रेस ने सत्ता के लिए संविधान को रद्दी किताब का टुकड़ा बना दिया था। ख़ैर संविधान को ख़तरे में बताना ये सियासी हथकंठा हो गया है।

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