नासिक से क़रीब 180 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर तक़रीबन 35000 युवाओं,महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की झुंड मुम्बई के आज़ाद मैदान पहुंची तो,शायद राज्य सरकार को पता चला कि कोई हमारे दर पर आया है।मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने पीसी कर जो कहा वो बेहद हैरान करने वाला है।मुख्यमंत्री की पीसी में ऐसा लगा कि उनको 'किसान' शब्द से परहेज़ है।किसानी तो एक पेशा है।वो किसी भी जाति या धर्म से हो सकता है।आदिवासी भी तो खेती करते ही हैं।उन्होंने कहा कि लॉन्ग मार्च कर आए लोगों की क़रीब-क़रीब सारी मांगें मान ली गई है।मार्च में 90% लोग आदिवासी हैं।मुख्यमंत्री के पास ऐसी कौन सी तकनीक है,जिससे कुछ हीं घंटों के भीतर उन्हें पता चल गया कि इतने प्रतिशत लोग आदिवासी हैं?इससे पहले जब 'पैदल लॉन्ग मार्च' शुरू हुआ था तब से लेकर आज़ाद मैदान, मुम्बई पहुंचने तक यही पता था कि इसमें ज़्यादातर किसान हैं,जो महाराष्ट्र सरकार पर वादाख़िलाफ़ी का आरोप लगा रहें हैं।इनकी मांग है कि सरकार स्वामीनाथन आयोग कि सिफ़ारिशों को लागू करे।मांग नहीं माने जाने तक वो विधानसभा का घेराव करेंगे।
मुख्यमंत्री की पीसी के बाद से एक सवाल ये है कि उन्होंने 180 किमी की पैदल यात्रा क्यों करवाई,जब उनको आदिवासियों की समस्या पहले से हीं पता था?सीएम ने कहा कि लिखित रूप में आश्वासन दिया गया है कि आदिवासियों की मांग को छह महीने के भीतर पूरा कर दिया जाएगा।लेकिन ये नहीं बताया कि कैसे?जो क़ानून क़रीब बारह साल में लागू नहीं कर पाए,वो छह महीने में कैसे लागू कर देंगे?15 दिसम्बर 2006 को संसद में पास 'अनूसुचित जाति और अन्य परम्परागत वन्य निवासी क़ानून' की महाराष्ट्र की हक़ीक़त ये है कि मात्र दो ज़िले गढ़चिरौली और नन्दूरबार में पुर्ण रूप से तो नहीं लेकिन लागू हो गया है।
किसानों की बात करें तो 20 जून 2017 को किसानों की कर्ज़माफी का एलान किया था लेकिन अभी तक लागू नहीं हो पाया है जिसकी वज़ह से लॉन्ग मार्च करना पड़ा।
मुख्यमंत्री की पीसी के बाद से एक सवाल ये है कि उन्होंने 180 किमी की पैदल यात्रा क्यों करवाई,जब उनको आदिवासियों की समस्या पहले से हीं पता था?सीएम ने कहा कि लिखित रूप में आश्वासन दिया गया है कि आदिवासियों की मांग को छह महीने के भीतर पूरा कर दिया जाएगा।लेकिन ये नहीं बताया कि कैसे?जो क़ानून क़रीब बारह साल में लागू नहीं कर पाए,वो छह महीने में कैसे लागू कर देंगे?15 दिसम्बर 2006 को संसद में पास 'अनूसुचित जाति और अन्य परम्परागत वन्य निवासी क़ानून' की महाराष्ट्र की हक़ीक़त ये है कि मात्र दो ज़िले गढ़चिरौली और नन्दूरबार में पुर्ण रूप से तो नहीं लेकिन लागू हो गया है।
किसानों की बात करें तो 20 जून 2017 को किसानों की कर्ज़माफी का एलान किया था लेकिन अभी तक लागू नहीं हो पाया है जिसकी वज़ह से लॉन्ग मार्च करना पड़ा।

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