रविवार, 18 फ़रवरी 2018

महिलाओं की सुरक्षा के प्रति कितनी लापरवाह है हमारी सरकारें!


निर्भया अब इस दुनिया में तो नहीं है,लेकिन वो जिस तरीके से हैवानियत का शिकार हुई थी,वक़्त-बे-वक़्त उसकी याद आ जाती है।गुगल करेंगे तो आप पाएंगें कि आज भी हमारे समाज में वैसे दरिदें हैं,जिनको कानून का डर नही है।याद कीजिए उस वक़्त के जन-आक्रोश को,जब निर्भया अस्पताल में ख़ामोशी से अपनी ज़िन्दगी से जंग लड़ रही थी,और देशभर में नेता और आम जनता अपने-अपने शहर के कोने-कोने में निर्भया के साथ हुए हैवानियत और महिलाओं की तत्कालिन सुरक्षा-व्यवस्था के ख़िलाफ़ तख़्ती लेकर सड़क पर मार्च कर रहे थें।क़ानून में बदलाव की मांग को लेकर लोग इतने गुस्से में थे,जैसे सिर्फ़ कानून में बदलाव कर देने से निर्भया के साथ जो हुआ,वो किसी बेटी के साथ नही होगा।लेकिन आज हक़ीकत ये है कि जब भी किसी लड़की/महिला के साथ बदसलूकी होती है तो वहां का समाज ख़ामोश तो रहता हीं है,वहां के विधायक और सांसद भी ना जाने क्यों ख़ामोश रह जाते हैं?कई बार तो पुलिस के काम करने का तरीक़ा भी हैरान कर जाता है।कानून में कई बदलाव भी हुए,उसका क़रीब पांच साल बाद कितना असर हुआ है शायद बताने की ज़रुरत नही हैं।मुझे लगता है कि ये कहना कि सिर्फ़ कड़े कानून बना देने से समाज में बदलाव हो जाएगा,ख़ुद को वास्तविकता से मुंह मोड़ने के जैसा है।बदलाव के लिए ज़मीनी स्तर पर लोगों और सरकारी कर्मचारियों को मिलकर काम करना ही पड़ेगा,ताकि निर्भया के साथ जो हुआ था वो किसी और बेटी के साथ ना हो। वरना एसी कमरे में लेदर की कुर्सी पर बैठकर क़ानून बनते रहेंगे और बदलाव सिर्फ़ काग़ज़ पर ही दिखेंगे।
निर्भया के साथ हुए जघन्य अपराध के बाद हो रहें तमाम विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया एक्ट बनाया।2013 में बलात्कार पीड़िताओं को आर्थिक रुप से सहायता पहुंचाने और महिला सुरक्षा के लिए उठाये जाने वाले क़दमों पर ख़र्च करने के लिए निर्भया फ़ण्ड भी बनाया गया।पांच साल बाद भी हमारी सरकारें महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कितनी लापरवाह हैं,इसका अंदाज़ा इन बातों से लगाया जा सकता है।निपुण सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 जनवरी को आदेश देते हुए सभी राज्य सरकारों से कहा था कि वो बताए कि उन्होनें यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं को निर्भया फ़ण्ड से कितना पैसा दिया गया और किन-किन पीड़ित महिलाओं को दिया गया।आपको जानकर हैरानी होगी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावज़ूद 24 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने हलफ़नामा दाख़िल नहीं किया।
हलफ़नामे के संदर्भ में अब बात करते हैं उन दो राज्यों की,जिसके मुख्यमंत्री महिला सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।पहले बात करते हैं मध्य प्रदेश की।भोपाल में एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के बाद 9 नवम्बर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि वो राज्य में सुरक्षा का ऐसा वातावरण चाहते हैं,जिसमें बहन-बेटिया अपनी मर्ज़ी से कहीं भी आ-जा सके।हादसे के बाद थाने में रिपोर्ट लिखवाने के लिए छात्रा को 3 थानों के बीच 24 घंटे भटकना पड़ा था।ये सब उस छात्रा के साथ हुआ,जिसके माता-पिता ख़ुद पुलिस में हैं।हलफ़नामें पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमुर्ती दीपक गुप्ता की पीठ ने बलात्कार पीड़िता को 6000-6500 रुपये देने पर,जमकर प्रदेश सरकार को फ़टकार लगाई।पूछा कि क्या आप खैरात बांट रहें है?आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?आप एक बलात्कार की कीमत 6500 रुपये लगा रहें है?आगे कहा कि वो हतप्रभ हैं निर्भया कोष योजना के तहत केन्द्र से सबसे अधिक पैसा प्राप्त करने वाला राज्य,बलात्कार पीड़िताओं को मात्र 6000-6500 रुपया दे रहा है।एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2017 में देश में 28,947 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज़ की गयी।जिसमें सिर्फ़ मध्यप्रदेश में हीं 4882 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना हुई,जो सभी राज्यों में अव्वल है।
अब बात करते हैं हरियाणा की।जनवरी मध्य में 48 घन्टे में मानवता को शर्मासार कर देने वाली बलात्कार की 4 वारदात से अभी हरियाणा उभरा भी नही था कि,सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि रेप की घटनाओ की सत्यता की पुष्टि होने से पहले सनसनी नही फ़ैलानी चाहिए।रेप के मामलों की संख्या बढ़ती हुई इसलिए नज़र आ रही है,क्योंकि उन में से कई फ़र्ज़ी आरोप होते हैं।क़ायदे मुख्यमंत्री को तो ये बताना चाहिए वो बलात्कार पीड़िता को इंसाफ़ दिलाने के लिए क्या कर रहें हैं?मध्य प्रदेश के बाद हरियाणा सरकार को पीठ ने जमकर फ़टकार लगाई।हरियाणा सरकार के वकील ने जैसे ही कहा कि वे हलफ़नामा दायर कर देंगे तो पीठ ने कहा,'अगर आपने हलफ़नामा दायर नहीं किया है तो इससे साफ़ पता चलता है कि अपने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आपके क्या विचार हैं।अपने राज्य की महिलाओं से कह दीजिए कि आपको उनकी परवाह नही है।'मुझे लगता है कि हरियाणा सरकार के नही कहने के बावज़ूद,आय दिन हो रही घटनाओं से पता तो चलता ही है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार कितना गम्भीर है।
ये तो हुई भाजपा शासित दो राज्यों की बात।अब बात करते हैं केन्द्र सरकार की।27 नवम्बर को राज्यसभा सांसद के रहमान ख़ान ने पूछा कि निर्भया फ़ण्ड के तहत तीन साल में अब तक कितनी रेप पीड़िताओं को सहयोग राशि प्रदान की गई है और कितनो को मिलना बाकी है?जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा कि रेप पीड़िताओं को सहयोग राशि का फ़ॉर्म सीधे राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा भरा जाता है,इसलिए कितनी रेप पीड़िताओं को सहयोग राशि मिलना अभी बाकी है,इसका आंकड़ा केन्द्र सरकार के पास नहीं है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ निर्भया फ़ण्ड से अगस्त 2017 तक 3000 करोड़ में से मात्र 264 करोड़ रुपये ख़र्च किये गए हैं।तो ये है महिलाओं की सुरक्षा के प्रति केन्द्र और राज्य सरकार की तत्परता।इसलिए व्यक्तिगत कर्तव्य समझकर आगे आईये और सुनिश्चित कीजिए कि कोई बेटी दरिन्दगी की शिकार ना हो।वरना जब-जब किसी बेटी के साथ हैवानियत होगी,समाज में बुरे माहौल का निर्माण होगा।




शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

बात,शिवराज के शासनकाल में संसाधनों से वंचित गांव की!

                 
चारो तरफ़ अंधेरे का साया है,अंधेरे साये के बीच दीये की रौशनी से ही ख़ुद की भविष्य रौशन करने में जुटी छात्राओं की ये तस्वीर भारत के ह्रदय कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश के फुटेरा धाने गांव की है।इस राज्य में 2003 से लगातार बीजेपी की सरकार है।पहले उमा भारती,बाद में बाबूलाल गौर और उसके बाद नवम्बर 2005 से लगातार शिवराज सिंह चौहान के हाथों में इस राज्य की बागडोर है।अति न्यूनतम संसाधन में भी भारत की साक्षरता दर बढ़ाने में जुटी भारत की इन होनहार बेटियों की तस्वीर,ये बता रही है कि सरकारों द्वारा विद्युतीकरण को लेकर चलाई चलाई जा रही अनेकों योजनाओं में से किसी एक का भी पहुंचना अभी बाकी है,जिसकी वज़ह से आज भी इस गांव के ज़्यादातर हिस्से में अंधेरा कायम है।बिजली के मामले में सरप्लस वाला राज्य मध्य प्रदेश के एक गांव का ये हाल हैरान करने वाला है।हाल ही में राज्य की बिजली कम्पनियों ने एक दिन में अधिकतम 12 हज़ार मेगावाट से अधिक की मांग को पूरा करने का रिकॉर्ड कायम किया है।राज्य के पावर प्लांटों की कुल बिजली उत्पादन की क्षमता 17.5 हज़ार मेगावट से अधिक है।
फुटेरा धाने गांव एक छोटा सा गांव है,जिसमें मात्र 15 परिवार रहते हैं।इस गांव में ना ही सड़क अच्छी है,ना पानी की उत्तम व्यवस्था है।पढ़ने के लिए बच्चों को रोज़ 8 किलोमीटर जाना पड़ता है।गांव वालों का कहना है कि वो बार-बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी समस्याओं के बारे में बताते हैं,लेकिन सरकार हमारी समस्याओं के निदान के लिए कोई कदम नही उठाती है।मैं मध्य प्रदेश कभी नही गया हूं,इसलिए मैं सिर्फ़ राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से ही मध्य प्रदेश को जानता हूं।राष्ट्रीय मीडिया मध्य प्रदेश की समस्याओं को कैसे कवर करती है,इसी ख़बर को गूगल करके देख लीजिए।तेज़ी से विकसीत हो रही शीर्ष के दूसरे राज्य से जब ये ख़बर सामने आई तो मैं चौंक गया।मैंने व्यक्तिगत तौर पर इस गांव की समस्या के बारे में जानने की कोशिश की।मैं चाहता था कि असली वज़ह को आपके सामने लाऊं।मैंने चुनाव आयोग,सीएमओ,सीएम से वहां के विधायक और सांसदों के बारे में जानने की कोशिश की,लेकिन कोई जवाब ना मिलने के कारण रहनुमाओं का पक्ष नहीं जान पाया।
डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब इण्डिया-2020 में लिखा है कि विकसित भारत बनाने के लिए कुछ क्षेत्रों में एकीकृत रुप से अनिवार्य विकास करना होगा,जिसमें ऊर्जा का भी स्थान है।डॉ0 कलाम,देश में लगातार तेज़ी से कम हो रहे ऊर्ज़ा के स्रोतों को लेकर चिन्तित थें।उन्होंने 2012 में काशी विश्वविद्यालय में आयोजित 20 वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए अपने चिन्ता जाहिर भी की थी।दुबई वैश्विक ऊर्ज़ा मंच-2011 में डॉ0 कलाम ने भारत द्वारा राजस्थान में सौर ऊर्जा केन्द्र के लिए शुरु किए गए कार्यक्रम की प्रशंसा की थी।डॉ0 कलाम ने कहा था कि एक सतत ऊर्जा कार्यक्रम की शुरूआत होने से हम बहुत खुश हैं।निरंतरता दो चीजों से आती है।पहली उपलब्धता और दूसरी यह कि भविष्य में हमारे पास स्वच्छ ऊर्ज़ा हो।2011 में ही एशियाई विकास बैंक के निदेशक माइकल बैरो ने कहा था "दुनिया में उच्च स्तर के सौर ऊर्ज़ा की क्षमता वाले देशों में भारत भी है।" ऐसा ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी लगता है।इसलिए उन्होंने बिजली सहज हर घर योजना-सौभाग्य के तहत सौर ऊर्ज़ा पर ज़्यादा बल दिया है।
केन्द्र सरकार बार-बार ये कहती है कि हम देश के कोने-कोने में 24*7 बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।सरकार द्वारा जुलाई 2015 से दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सितम्बर 2017 से बिजली सहज हर घर योजना-सौभाग्य चलाई जा रही है।सौभाग्य योजना के तहत सुदूर और दुर्गम इलाकों को भी रौशन करने का प्रावधान है।योजना के तहत सुदूर और दुर्गम इलाकों में 200 से 300 डब्लूपी का सोलर पावर पैक देने का प्रावधान है।पैक में 5 एलईडी बल्ब,एक डीसी पंखा और एक डीसी पावर प्लग का प्रावधान होगा।सरकार पांच साल तक बैट्री बैंक के मरम्मत का भी ख़र्च उठाएगी।योजना का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने दोहराया था कि सरकारी कर्मचारियों को अपने कार्यशैली में बदलाव करना ताकि योजना का लाभ सभी को मिल सके।पीएम की बात को सरकारी कर्मचारियों ने कितना माना है,आपके सामने है।मध्य प्रदेश के मुरैना से बीजेपी सांसद अनूप मिश्रा ने लोकसभा में कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी की कमी है।निगरानी ज़रुरी है तभी जनता को योजनाओं का लाभ मिलेगा।अनूप मिश्रा जैसे कई लोग हैं,जो आवाज़ उठाते हैं,लेकिन उनकी सुनी नही जाती है। 


                                                          

भारत की राज-व्यवस्था

- भारत के संविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन लगे थे। -1600 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में आगमन हुआ। - महारानी एलिजाबेथ प्र...