शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

बात,शिवराज के शासनकाल में संसाधनों से वंचित गांव की!

                 
चारो तरफ़ अंधेरे का साया है,अंधेरे साये के बीच दीये की रौशनी से ही ख़ुद की भविष्य रौशन करने में जुटी छात्राओं की ये तस्वीर भारत के ह्रदय कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश के फुटेरा धाने गांव की है।इस राज्य में 2003 से लगातार बीजेपी की सरकार है।पहले उमा भारती,बाद में बाबूलाल गौर और उसके बाद नवम्बर 2005 से लगातार शिवराज सिंह चौहान के हाथों में इस राज्य की बागडोर है।अति न्यूनतम संसाधन में भी भारत की साक्षरता दर बढ़ाने में जुटी भारत की इन होनहार बेटियों की तस्वीर,ये बता रही है कि सरकारों द्वारा विद्युतीकरण को लेकर चलाई चलाई जा रही अनेकों योजनाओं में से किसी एक का भी पहुंचना अभी बाकी है,जिसकी वज़ह से आज भी इस गांव के ज़्यादातर हिस्से में अंधेरा कायम है।बिजली के मामले में सरप्लस वाला राज्य मध्य प्रदेश के एक गांव का ये हाल हैरान करने वाला है।हाल ही में राज्य की बिजली कम्पनियों ने एक दिन में अधिकतम 12 हज़ार मेगावाट से अधिक की मांग को पूरा करने का रिकॉर्ड कायम किया है।राज्य के पावर प्लांटों की कुल बिजली उत्पादन की क्षमता 17.5 हज़ार मेगावट से अधिक है।
फुटेरा धाने गांव एक छोटा सा गांव है,जिसमें मात्र 15 परिवार रहते हैं।इस गांव में ना ही सड़क अच्छी है,ना पानी की उत्तम व्यवस्था है।पढ़ने के लिए बच्चों को रोज़ 8 किलोमीटर जाना पड़ता है।गांव वालों का कहना है कि वो बार-बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी समस्याओं के बारे में बताते हैं,लेकिन सरकार हमारी समस्याओं के निदान के लिए कोई कदम नही उठाती है।मैं मध्य प्रदेश कभी नही गया हूं,इसलिए मैं सिर्फ़ राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से ही मध्य प्रदेश को जानता हूं।राष्ट्रीय मीडिया मध्य प्रदेश की समस्याओं को कैसे कवर करती है,इसी ख़बर को गूगल करके देख लीजिए।तेज़ी से विकसीत हो रही शीर्ष के दूसरे राज्य से जब ये ख़बर सामने आई तो मैं चौंक गया।मैंने व्यक्तिगत तौर पर इस गांव की समस्या के बारे में जानने की कोशिश की।मैं चाहता था कि असली वज़ह को आपके सामने लाऊं।मैंने चुनाव आयोग,सीएमओ,सीएम से वहां के विधायक और सांसदों के बारे में जानने की कोशिश की,लेकिन कोई जवाब ना मिलने के कारण रहनुमाओं का पक्ष नहीं जान पाया।
डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब इण्डिया-2020 में लिखा है कि विकसित भारत बनाने के लिए कुछ क्षेत्रों में एकीकृत रुप से अनिवार्य विकास करना होगा,जिसमें ऊर्जा का भी स्थान है।डॉ0 कलाम,देश में लगातार तेज़ी से कम हो रहे ऊर्ज़ा के स्रोतों को लेकर चिन्तित थें।उन्होंने 2012 में काशी विश्वविद्यालय में आयोजित 20 वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए अपने चिन्ता जाहिर भी की थी।दुबई वैश्विक ऊर्ज़ा मंच-2011 में डॉ0 कलाम ने भारत द्वारा राजस्थान में सौर ऊर्जा केन्द्र के लिए शुरु किए गए कार्यक्रम की प्रशंसा की थी।डॉ0 कलाम ने कहा था कि एक सतत ऊर्जा कार्यक्रम की शुरूआत होने से हम बहुत खुश हैं।निरंतरता दो चीजों से आती है।पहली उपलब्धता और दूसरी यह कि भविष्य में हमारे पास स्वच्छ ऊर्ज़ा हो।2011 में ही एशियाई विकास बैंक के निदेशक माइकल बैरो ने कहा था "दुनिया में उच्च स्तर के सौर ऊर्ज़ा की क्षमता वाले देशों में भारत भी है।" ऐसा ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी लगता है।इसलिए उन्होंने बिजली सहज हर घर योजना-सौभाग्य के तहत सौर ऊर्ज़ा पर ज़्यादा बल दिया है।
केन्द्र सरकार बार-बार ये कहती है कि हम देश के कोने-कोने में 24*7 बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।सरकार द्वारा जुलाई 2015 से दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सितम्बर 2017 से बिजली सहज हर घर योजना-सौभाग्य चलाई जा रही है।सौभाग्य योजना के तहत सुदूर और दुर्गम इलाकों को भी रौशन करने का प्रावधान है।योजना के तहत सुदूर और दुर्गम इलाकों में 200 से 300 डब्लूपी का सोलर पावर पैक देने का प्रावधान है।पैक में 5 एलईडी बल्ब,एक डीसी पंखा और एक डीसी पावर प्लग का प्रावधान होगा।सरकार पांच साल तक बैट्री बैंक के मरम्मत का भी ख़र्च उठाएगी।योजना का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने दोहराया था कि सरकारी कर्मचारियों को अपने कार्यशैली में बदलाव करना ताकि योजना का लाभ सभी को मिल सके।पीएम की बात को सरकारी कर्मचारियों ने कितना माना है,आपके सामने है।मध्य प्रदेश के मुरैना से बीजेपी सांसद अनूप मिश्रा ने लोकसभा में कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी की कमी है।निगरानी ज़रुरी है तभी जनता को योजनाओं का लाभ मिलेगा।अनूप मिश्रा जैसे कई लोग हैं,जो आवाज़ उठाते हैं,लेकिन उनकी सुनी नही जाती है। 


                                                          

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