#RepublicDay2021 के दिन #TractorMarchDelhi में किसान नेताओं के द्वारा किए वादे के साथ मर्यादा टूटने के बाद कुछ मासूम और भोले-भाले लोग इस तरह की मूर्खतापूर्ण बातें कर रहे हैं -
Delhi Police ये बात 25 जनवरी की शाम को ही किसान नेताओं से मीटिंग के बाद साफ़ कर दी थी कि #tractorParade में हिंसा के संकेत मिले रहे हैं, लेकिन शान्ति पूर्ण ट्रैक्टर मार्च हो इसकी पूरी कोशिश रहेगी। चलिए यहां पर मान लेते हैं कि दिल्ली पुलिस फ़ेल रही।
शान्ति पूर्ण ट्रैक्टर मार्च का किसान नेताओं का भी दावा था। उनकी तैयारी यहाँ तक थी कि सभी रूटों पर ट्रैक्टरों पर निगरानी रखने के लिए अपने लोगों की तैनाती की थी। आसान भाषा में कहें तो दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस जैसी ही अपने ट्रैफ़िक कर्मियों की तैनाती की थी। यह ठीक वैसी ही बात है जैसे सरकार से बातचीत में अपना खाना ले जाते थे, सरकार से कोई मतलब नहीं है।
अब आते हैं मासूम और भोले-भाले लोगों की बातों पर। उपद्रवी किसानों द्वारा लाल क़िले पर धार्मिक झंडा फहराने का बचाव बड़ी चालाकी से पुरानी घटनाओं से कर रहे हैं। जैसे Bharatiya Janata Party (BJP) के नेता और उसके समर्थक हर बात को अपमान से जोड़ देते हैं, ठीक उसी तरह का काम ये मासूम और भोले-भाले लोग कर रहे हैं। बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय मस्जिद के गुंबद पर और उदयपुर में कोर्ट के मुख्य द्वार पर भगवा झंडा लगाने का उदाहरण देकर पूछ रहे हैं कि एक सही और एक ग़लत कैसे हो सकता है? या तो दोनों ग़लत है या दोनों सही है? मतलब विरोध में ग़लत को सीधे ग़लत कहने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
कुछ लोग कह रहे हैं कि पर्याप्त संख्या में पुलिस की तैनाती नहीं थी। क्या ऐसा संभव है कि हर व्यक्ति पर एक पुलिस की तैनाती की जाए?
किसान आन्दोलन का नेतृत्व करने वाले किसान नेता अब इस बात को स्वीकार लें कि वो एक नाकाम नेतृत्वकर्ता हैं। उनके ज़िद/गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टरी रैली निकालने की तमन्ना की वजह से उनके नेतृत्व में गणतंत्र दिवस के दिन दुनिया भर में भारत की बदनामी हुई है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें