मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

कोरोना'काल में और बाद में हम!

आज प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन को 3 मई 2020 तक बढ़ा दिया है। मतलब आजतक हम लोग लॉकडाउन के जिन-जिन नियमों का पालन कर रहे थें उसका 3 मई तक पालन करना होगा। बिना ज़रूरत के पहले की तरह लक्ष्मण रेखा पार नहीं करना होगा। पीएम मोदी ने अपने सम्बोधन में कहा है कि अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 20 अप्रैल के बाद से कुछ गतिविधियों में छूट दी जाएगी, लेकिन मामला गड़बड़ होने पर छूट को समाप्त कर दिया जाएगा। मतलब साफ़ है कि आप और हम (जनता) सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के नियमों का कैसे पालन करते हैं, ताकि कोरोनावायरस के संक्रमण का मामला बढ़े भी ना और उन लोगों कामगारों, व्यापारियों, दुकानदारों का आर्थिक पहिया घूमने लगे, जो देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 
इस वक़्त पूरी दुनिया में कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए एक मात्र विकल्प है सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन, क्योंकि कोविड-19 अबतक लाइलाज बीमारी है।  कोरोनावायरस के आगे वो सारे मुल्क जो मिसाइल और आधुनिक हथियारों के दम पर दूसरे देशों को धमकाते फिरते थे, वो सब लाचार नज़र आ रहे है। विश्व की दो महाशक्ति कहे जाने वाले चीन और अमेरिका की हालात कितनी बदतर है, किसी से छिपा नहीं है। इन दोनों देशों में कोरोनावायरस से हर रोज़ सैंकड़ों लोगों की जानें जा रही है, लेकिन सरकारें कुछ कर नहीं पा रही हैं। अगर लोग संक्रमित हो जा रहें तो उनकी ज़िन्दगी भगवान भरोसे ही है। मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयों का अबतक कोई पुख़्ता प्रमाण नहीं मिला है कि कोरोनावायरस के मरीज़ों का इन दवाइयों से इलाज किया जा सकता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कोरोनावायरस के आगे सब कोई लाचार है। इसलिए दुनियाभर के देश लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग बनाएं रखने और स्वच्छता पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। इन सब के बीच कुछ सवाल जो सबसे महत्वपूर्ण है वो यह है कि कोरोना'काल से दुनिया कबतक निकलेगी और जब निकलेगी तो कैसी होगी दुनिया? देशों की आर्थिक सेहत कितनी बुरी होगी और कितनी जल्दी आर्थिक सेहत ठीक हो जाएगा? क्या मिसाइल और आधुनिक हथियारों के दम पर डराने वाले मुल्कों की आर्थिक हालत वैसी ही रहेगी,जैसी पहली थी? शायद इन सवालों के जवाब आने वाले वक़्त में मिलेंगे। एक जो सवाल है कि कैसी होगी दुनिया, अगर इसके आर्थिक परिप्रेक्ष्य की बात ना करें, तो इंसानों की बदली आदतों के आधार पर दावे के साथ तो नहीं, लेकिन अनुमान लगाया जा सकता है, जो इस काल से बचकर निकल जाएंगे, वो इस बात का ज़रूर ख़याल रखेंगे कि प्राकृतिक से खिलवाड़ नहीं करेंगे और स्वच्छता और खान-पान में आए बदलाव को जारी रखेंगे। 
हम सब जानते हैं कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारे देश की हालत कैसी है। ना तो ज़रूरत के हिसाब चिकित्साकर्मी हैं और ना ही ज़रूरत के हिसाब से स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर है। ऐसे में इन दिनों बहुत ज़रूरी है कि ख़ुद ही अपना ख़याल रखें और कोरोनावायरस के संक्रमण से बचने के लिए जो उपाय सुझाए गए हैं, उनका पालन करें।

दुनियाभर में इन दिनों हाथ मिलाकर अभिवादन करने की बजाय नमस्ते किया जा रहा है,जो हमारी भारतीय सभ्यता में पहले से ही थी, लेकिन आधुनिकता के दौर में हम में से ज़्यादातर लोग भूल गए थें। लेकिन इस बदले हुए जमाने में भी मैं और मेरे सहकर्मी अमित पालित एक दूसरे का अभिवादन नमस्ते करके ही करते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाथों को समय-समय पर ठीक से धोने के लिए सलाह दिया,जिसको हमसब को कोरोना'काल के बाद भी जारी रखना होगा। ताकि हम स्वच्छ और स्वस्थ रहेंगे तो देश भी स्वच्छ और स्वस्थ रहेगा।

आयुष मंत्रालय,भारत सरकार ने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं, जिसका पालन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। 

इन दिनों भारत की तमाम नदियां पहले से ज़्यादा निर्मल दिखाई दे रहीं हैं। यह सही वक़्त है उन सभी फ़ैक्ट्री मालिकों के पास जिनकी वज्ह से नदियों का पानी दूषित होता है, विचार करें और नदियों में जाने वाले अवशेषों को रोकने की व्यवस्था करें।

इन दिनों भारत के वे सभी शहर जिसकी गिनती वायु प्रदुषण की वज्ह से दुनिया के दूषित शहरों में होती थी, वहां के जीव-जन्तु लॉकडाउन की वज्ह से शुद्ध हवा ले रहे हैं।ऐसे शहरों में रहने वाले सभी लोगों को चाहिए कि लॉकडाउन के समाप्त होने के बाद भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करें ताकि वायु प्रदुषित होने से बचा रहे।

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