हर कोई किसी ना किसी रिश्ते की डोर में बंधा
होता है और रिश्ते की पहली शर्त होती है कि हर कोई उम्मीद करता है कि चाहे वह ख़ुद
कैसे भी बोले/ बात करे लेकिन सामने वाला तहज़ीब से बात
करे। लेकिन आज के समय में ऐसी उम्मीद करना शायद ख़ुद से बेईमानी करने जैसा है। ‘जैसे को तैसा’ वाले समय में हर किसी को समझना पड़ेगा कि
आप जब किसी का सम्मान नहीं करेंगे तो शायद ही सामने वाला भी आपका सम्मान करेगा। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपके रिश्तों
में मतभेद का होना तय है। इसलिए बहुत ज़रूरी है कि बातचीत करते वक़्त
तहज़ीब यानि तरीक़े से बात करें। हमारे समाज में सास-बहू का रिश्ता ऐसा है जिसके
मतभेद में यह तय करना लगभग नामुमकिन होता है कि सास ग़लत है या बहू। इस रिश्ते में
मतभेद के अनन्त किस्से हैं। मैं आपको यहाँ एक उदाहरण दे रहा हूँ कि तहज़ीब कैसे
रिश्ते में मतभेद नहीं होने देता है।
अभी कुछ दिनों पहले मैं अपने एक परिचित के घर गया हुआ था। हाल ही में उनके बेटे की शादी हुई है। मैं उनके साथ बैठकर बातें कर रहा था, तो देखा कि उनकी बहू गिलास में दाल लेकर आई। दाल एक ऐसी चीज़ है जो थोड़ी बहुत बच ही जाती है। मुझे याद है कि जब मैं छोटा था तो शाम को जो दाल बच जाती थी, उनको कई बार मुझे पीने के लिए दिया जाता था। हम दोनों एक दूसरे से भोजपुरी में बात कर रहे थे,इसलिए मैं उनकी बातों को भोजपुरी में लिख रहा हूँ ताकि समझने में आसानी हो कि किसी बात को समझाने का लहजा कैसा होना चाहिए।
अभी कुछ दिनों पहले मैं अपने एक परिचित के घर गया हुआ था। हाल ही में उनके बेटे की शादी हुई है। मैं उनके साथ बैठकर बातें कर रहा था, तो देखा कि उनकी बहू गिलास में दाल लेकर आई। दाल एक ऐसी चीज़ है जो थोड़ी बहुत बच ही जाती है। मुझे याद है कि जब मैं छोटा था तो शाम को जो दाल बच जाती थी, उनको कई बार मुझे पीने के लिए दिया जाता था। हम दोनों एक दूसरे से भोजपुरी में बात कर रहे थे,इसलिए मैं उनकी बातों को भोजपुरी में लिख रहा हूँ ताकि समझने में आसानी हो कि किसी बात को समझाने का लहजा कैसा होना चाहिए।
बताव..तू जोन इ रोज़-रोज़ दाल फेंक देवे
लू...केतना महंगा आवेला...या त कम बनावअ चाहे बच जाए तक हमनी के दे द पीए
ला...फेंकला पर त बर्बादे नू होई...कहने मतलब यह है कि जो रोज़- रोज़ दाल बच जाती
थी उसको उनकी बहू फेंक देती थी। जब उन्होंने बहू को समझा दिया तो शाम को जब भी बर्तन
धोने जाती है, बचे हुए दाल या जो कुछ भी बचा रहता है उसको फेंकने की बजाय खाने के
लिए दे जाती है।
कहने तात्पर्य यह है किसी से भी बात करने का
लहजा बिल्कुल ही शान्त और नर्म होने चाहिए।
Okay then...
जवाब देंहटाएंWhat I'm going to tell you may sound kind of creepy, and maybe even a little "out there..."
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