बुधवार, 17 जून 2020

भारत-चीन सीमा-विवाद: संयम बरतने का वक़्त है जनाब!

भारत-चीन सीमा विवाद में 20 जवानों की शहादत के बाद चीन के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर आक्रोश और अपशब्दों के बाढ़ आ गए हैं। क्या आम क्या ख़ास, सब ग़ुस्से में हैं। और हो भी क्यूँ ना, माँ भारती की रक्षा में हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। लेकिन ग़ुस्से का इज़हार करते वक़्त याद रखना चाहिए कि आवेश में आकर हम कुछ ऐसा तो नहीं कर रहे हैं, जिससे दुश्मन को फ़ाइदा हो जाए... हमारे किए को सबूत बनाकर वैश्विक स्तर पर भारत के ख़िलाफ़ चाइना उसका इस्तेमाल ना कर लें।

बहुत सारे पत्रकारों का भी पोस्ट पढ़ा, वे लोग भी भड़काने जैसे वाक्य लिखे हैं। कई तो कह रहे हैं कि तोप,बम-बारूद किस लिए रखे हो..चीन को सबक़ सिखाने के लिए उसका इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसे बन्धुओं से अनुरोध है कि जब ग़ुस्सा आए तो एक गिलास ठंडा पानी पिएं और फिर सोचे कि वो जो हिंसक ख़याल उनके मन में आया है,उससे कोई फ़ाइदा होगा? युद्ध से ना तो विवाद समाप्त होता और ना ही शान्ति स्थापित होती है, फिर युद्ध क्यों करना? गांधी की धरती से पूरी दुनिया में अहिंसा का सन्देश फैला और उन्ही की धरती से मरने-मारने की बात होना,थोड़ा अजीब है। 

जैसा कि हम सब जानते हैं कि चाइना एक धोखेबाज़ देश है। छल उसके डीएनए में है। यह कई मौक़ों पर साबित हो चुका है और इस बार फ़िर उसने साबित कर दिया है। 6 जून को कमांडर लेवल की बातचीत में तय हो गया था कि दोनों देश के सैनिक अपनी-अपनी सीमा में लौट जाएंगे, लेकिन चीन ने ऐसा नहीं किया है। अभी कुछ देर पहले दोनों देश के विदेश मंत्रियों की बातचीत में भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने चेताया है कि LAC पर चीन अगर अपनी आदत से बाज नहीं आता है तो द्विपक्षीय रिश्ते पर असर पड़ेगा। बातचीत में दोनों से कशीदगी कम करने पर सहमति बनी है। देखना होगा चाइना क्या करता है।

भारत सरकार सीमा-विवाद को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी देती नहीं है, यह आदत बदलनी चाहिए। भारत..चाइना जैसा नहीं है कि कितने जवान मारे गए, उसकी जानकारी अपने देशवासियों को भी नहीं देता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और सरकार की ज़िम्मेवारी होती है विपक्षी दलों और देशवासियों को जानकारी दे कि सीमा पर क्या हालात हैं। लोगों को भी सरकार से सवाल पूछना चाहिए, ज़िम्मेवारी तय करनी चाहिए कि सीमा पर क्या हालात है, वरना चाइनीज़ ऐप अन-इंस्टॉल और चाइनीज़ सामानों का बहिष्कार करते रह जाएंगे और चीन हम पर ज़ुल्म करता रहेगा।

बुधवार, 3 जून 2020

कोरोना काल में ‘क्या करें...क्या ना करें’


फ़िल्म रंगीला का एक गाना है क्या करें क्या ना करें कैसी मुश्किल है, कोई तो बता दे इसका हल ओ मेरे भाईमुझे लगता है कि कोरोना संकट में पुरे दुनिया की यही स्थिति है। हर देश की निगाहें उस संस्था पर जाके टिक जाती है जो कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करने या उसके लक्षणों पर रिसर्च कर रहा है, लेकिन पुख़्ता तौर पर अभी भी कोई कोरोना संकट का हल नही बता पाया है। ऐसे में दुनियाभर में असंमजस की स्थिति बनी हुई है कि संकट से निजात पाने के लिए क्या किया जाए, कौन सा क़दम उठाया जाए जिससे कोरोना संक्रमण की श्रृखंला टूटे।

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लॉकडाउन 1.0 का ऐलान करते वक़्त भी इसी बात पर ज़ोर दिया था कि किसी भी तरह से हमें कोरोना के संक्रमण को तोड़ना है और इसके लिए सबसे ज़रूरी है सोशल डिस्टेंसिंग। तब देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 564 थी। इसके बाद लॉकडाउन 2.0, 3.0, 4.0 और अब हमारा देश अनलॉक 1.0 हो गया है। मतलब कुछ गतिविधियों को केन्द्र सरकार ने सशर्त खोल दिया है, कुछ गतिविधियों को आने वाले दिनों में धीरे-धीरे खोल दिया जाएगा और साथ ही राज्यों को अधिकार दे दिया है कि यदि राज्य सरकार चाहे तो कुछ गतिविधियों पर पाबन्दी आयत कर सकती है। चार लॉकडाउन के बाद वर्तमान में देश में कोरोना वायरस से मरीज़ों की संख्या एक लाख के पार है, एक लाख़ से ज़्यादा लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं और पांच हज़ार से ज़्यादा लोगों की ज़्यादा लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो चुकी है। मतलब कुल मिलाकर क़रीब 135 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश में कोरोना वायरस के कुल मरीज़ों की संख्या 2,07,615 है। अच्छी बात यह है कि यदि आज के आधार पर बात करें तो आज कोरोना से पूरे देश में 8,909 लोग वायरस से संक्रमित हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ 4,776 लोग ठीक भी हुए हैं, मतलब जितने लोग संक्रमित हुए उससे आधे से ज़्यादा लोग ठीक हुए। लेकिन कोरोना वायरस से एक व्यक्ति का भी संक्रमित होना हमारे लिए चिन्ता की बात है। भारत में जब पहली बार लॉकडाउन का ऐलान किया था तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की तारीफ़ की थी और कहा था कि केन्द्र सरकार ने बहुत सही समय पर तालाबन्दी का फ़ैसला किया है। और उसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने दुनिया को समय-समय पर चेताया कि यदि तालाबन्दी खोलने में किसी ने भी जल्दबाज़ी की तो नताइज बुरे होंगे। मतलब साफ़ है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन तब तक तालाबन्दी के पक्ष में है जबतक कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा समाप्त नहीं हो जाता है। अब सवाल है कि आख़िर कितने दिनों तक देश को लॉकडाउन रखा जा सकता है? शायद यह जवाबहीन सवाल है। वज्ह ये है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में अबतक कोई पुख़्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। रोज़ नये-नये लक्षण और नई-नई जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में बहुत मुश्किल काम है यह ठीक-ठीक बता पाना कि कितने दिनों की तालाबन्दी के बाद कोरोना का संक्रमण ख़त्म हो जाएगा। शायद इसी वज्ह से दुनियाभर के देशों में तालाबन्दी को धीरे-धीरे हटाकर आर्थिक गतिविधियों को शुरू किया जा रहा है, ताकि भूखमरी की स्थिति ना उत्पन्न हो जाए। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अब जान भी और जहान भी  ज़रुरी है, इसलिए सरकार ने तालाबन्दी खोल दिया है। ऐसी स्थिति में एक नागरिक के रूप में हम सब की ज़िम्मेवारी बनती है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सुझाए उन तमाम उपायों का पालन करें जब तक कोरोना से ठीक होने का इलाज नहीं मिल जाता है। घर से बाहर निकलते समय ग्लब्स और फ़ेस मास्क का इस्तेमाल करें, दो मीटर की दूरी बनाए रखें, कोशिश करें कि किसी भी भीड़ में शामिल ना हों चाहे कुछ ख़रीदना ही क्यूँ ना हो। ऑफ़िस/ काम से लौटने के बाद कोशिश करें कि बच्चों और परिवार के बुढ़े लोगों के सम्पर्क में बिना ख़ुद साफ़-सुथरा किए हुए ना आये। 

भारत की राज-व्यवस्था

- भारत के संविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन लगे थे। -1600 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में आगमन हुआ। - महारानी एलिजाबेथ प्र...